
भोजपुरी छठ गीत (Bhojpuri Chhath Geet) और छठी मैया के लोकगीत (Chhathi Maiya Ke Lokgeet) छठ महापर्व की आस्था, भक्ति और समृद्ध लोकसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। छठ पूजा के इन प्रसिद्ध पारंपरिक गीतों में सूर्य देव की उपासना, , छठी मैया की महिमा, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के मंगल की कामना की जाती है।”।
काँच ही बाँस के बहंगिया, केलवा जे फरेला घवद से, उग हे सूरज देव, पहिले-पहिले हम कइनी छठी मइया व्रत तोहार जैसे लोकप्रिय Chhath Puja Songs और Traditional Bhojpuri Chhath Geet आज भी बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई क्षेत्रों में श्रद्धा के साथ गाए जाते हैं। इस लेख में जानिए प्रसिद्ध छठ पूजा के लोकगीत, Chhathi Maiya Bhajan, छठी मैया के पारंपरिक गीत और उनके हिंदी भावार्थ, ताकि आप इन भक्तिमय गीतों के धार्मिक महत्व और भोजपुरी लोकसंगीत की सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें।
छठ पूजा: कांच ही बांस के बहंगिया (Chhath: Kanch Hi Bans Ke Bahangiya)
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
होई ना बलम जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
बाट जे पूछेला बटोहिया,
बहंगी केकरा के जाय
बहंगी केकरा के जाय
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया,
बहंगी छठ मैया के जाय
बहंगी छठ मैया के जाय
ओहरे जे बारी छठि मैया,
बहंगी उनका के जाय
बहंगी उनका के जाय
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाय
बहंगी लचकत जाय
होई ना देवर जी कहरिया,
बहंगी घाटे पहुंचाय
बहंगी घाटे पहुंचाय
ऊंहवे जे बारि छठि मैया
बहंगी के उनके के जाय
बहंगी उनका के जाय
BhaktiBharat Lyrics
बाट जे पूछेला बटोहिया
बहंगी केकरा के जाय
बहंगी केकरा के जाय
तू तो आन्हर होवे रे बटोहिया
बहंगी छठ मैया के जाय
बहंगी छठ मैया के जाय
ऊंहवे जे बारी छठि मैया
बहंगी उनका के जाय
बहंगी उनका के जाय
काँच ही बाँस के बहंगिया (Kanch Hi Bans Ke Bahangiya) – छठ पूजा लोकगीत
काँच ही बाँस के बहंगिया छठ महापर्व का लोकप्रिय भोजपुरी लोकगीत है। इस Chhath Puja folk song में बाँस की बहंगी लेकर छठ घाट जाने, छठी मैया के लिए प्रसाद अर्पित करने और व्रत की पारंपरिक तैयारियों का भावपूर्ण चित्रण मिलता है।
काँच ही बाँस के बहंगिया गीत का भावार्थ
इस लोकगीत में बहंगी लेकर छठ घाट जाने की परंपरा का वर्णन है। रास्ते में एक राहगीर पूछता है कि बहंगी किसके लिए ले जाई जा रही है। उत्तर में बताया जाता है कि यह बहंगी छठी मैया की पूजा के लिए है।
गीत की इन पंक्तियों में छठी मैया के प्रति श्रद्धा, पूजा की पवित्रता और परिवार के सहयोग का भाव दिखाई देता है। बाँस की बहंगी में फल और पूजा सामग्री लेकर घाट तक पहुँचना छठ पर्व की लोकपरंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छठ पूजा में बहंगी का महत्व
छठ पूजा में बाँस से बने सूप और बहंगी का उपयोग पारंपरिक रूप से पूजा सामग्री तथा प्रसाद ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें फल, नारियल, ठेकुआ और अन्य पूजन सामग्री रखी जाती है। बहंगी और सूप जैसे प्राकृतिक पदार्थों का प्रयोग इस पर्व की ग्रामीण संस्कृति और प्रकृति से जुड़े स्वरूप को दर्शाता है।
बहंगी बाँस से बना एक पारंपरिक साधन है, जिसका उपयोग छठ पूजा में फल, नारियल और पूजा की सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें आमतौर पर बाँस के एक लंबे डंडे के दोनों सिरों पर टोकरियाँ या डलियाँ बाँधी जाती हैं, जिन्हें कंधे पर रखकर ले जाया जाता है।
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