Skip to content

श्री सत्यनारायण जी की आरती (Hindi & Roman English) | Sampurna Aarti, Meaning, Benefits

    Shri Satyanarayan जी की आरती हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। विशेष रूप से पूर्णिमा, व्रत, विवाह, गृह प्रवेश और शुभ अवसरों पर इस आरती का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से आरती करने पर भगवान सभी कष्ट दूर करते हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। Shri Satyanarayan जी की आरती हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। यह आरती विशेष रूप से पूर्णिमा, सत्यनारायण व्रत, गृह प्रवेश, विवाह, नामकरण और अन्य शुभ अवसरों पर श्रद्धा के साथ गाई जाती है। भगवान सत्यनारायण, जो कि Vishnu जी का ही एक स्वरूप हैं, अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उनके जीवन से दुख, दरिद्रता और बाधाओं को दूर करते हैं।

    आज के समय में, जब जीवन में तनाव, आर्थिक समस्याएं और मानसिक अशांति बढ़ती जा रही है, ऐसे में सत्यनारायण जी की आरती एक आध्यात्मिक शक्ति के रूप में कार्य करती है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति नियमित रूप से इस आरती का पाठ करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। यह आरती केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमें सत्य, श्रद्धा और सकारात्मकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

    इस लेख में हम आपको श्री सत्यनारायण जी की सम्पूर्ण आरती (Hindi + Roman English), उसके अर्थ (Meaning), महत्व (Importance), लाभ (Benefits) और पूजा विधि (Vidhi) के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप इसे सही तरीके से अपने जीवन में अपनाकर भगवान की कृपा प्राप्त कर सकें।

    🪔 श्री सत्यनारायण जी की आरती (Hindi Lyrics)

    ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
    सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥

    रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजै।
    नारद करत निराजन, घंटा ध्वनि बाजै॥

    प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो।
    बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥

    दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी।
    चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपत्ति हरी॥

    वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं।
    सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति कीन्हीं॥

    भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो।
    श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सरयो॥

    ग्वाल-बाल संग राजा, वन में भक्ति करी।
    मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयालु हरी॥

    चढ़त प्रसाद सवायो, कदलीफल, मेवा।
    धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥

    श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावै।
    ऋद्धि-सिद्धि सुख-संपत्ति, जी भरके पावे॥

    🪔 Satya Narayan Bhagwan Aarti English Lyrics

    Om Jai Lakshmi Ramana, Swami Jai Lakshmi Ramana
    Satyanarayan Swami, Jan Paapak Harana

    Ratna Jadit Singhasan, Adbhut Chhavi Raaje
    Narad Karat Nirajan, Ghanta Dhvani Baaje

    Prakat Bhaye Kali Kaaran, Dwij Ko Daras Diyo
    Budha Brahman Bankar, Kanchan Mahal Kiyo

    Durbal Bhil Katharo, Jin Par Kripa Kari
    Chandrachud Ek Raja, Jinki Vipatti Hari

    Vaishya Manorath Paayo, Shraddha Taj Deenhi
    So Phal Bhogyo Prabhuji, Phir Stuti Keenhi

    Bhav Bhakti Ke Kaaran, Chhin-Chhin Roop Dharayo
    Shraddha Dharan Keenhi, Tinko Kaaj Sarayo

    Gwal-Baal Sang Raja, Van Mein Bhakti Kari
    Manvanchhit Phal Deenho, Deen Dayalu Hari

    Chadhat Prasad Savayo, Kadali Phal, Meva
    Dhoop-Deep-Tulsi Se, Raaji Satyadeva

    Shri Satyanarayan Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gaave
    Riddhi Siddhi Sukh Sampatti, Jee Bharke Paave

    आरती का महत्व (Importance)

    • जीवन में सत्य और धर्म का पालन सिखाती है
    • परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है
    • मन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं
    • पापों का नाश होता है

    🙏 आरती करने के लाभ (Benefits)

    • मानसिक शांति मिलती है
    • आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
    • घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है
    • भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है

    🪔 आरती कैसे करें? (How to Perform)

    1. पूजा स्थान को साफ करें
    2. भगवान Vishnu या सत्यनारायण जी की मूर्ति रखें
    3. दीपक, धूप, फूल और प्रसाद अर्पित करें
    4. श्रद्धा से आरती गाएं
    5. अंत में प्रसाद वितरित करें

    Satyanarayan भगवान की कथा किसी भी दिन श्रद्धा से की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष अवसर ऐसे होते हैं जब इसे करना अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है।

    सबसे पहले, हर महीने की पूर्णिमा का दिन सत्यनारायण कथा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन भगवान Vishnu की पूजा विशेष फल देती है और घर में सुख-शांति आती है।

    इसके अलावा, जीवन के किसी भी शुभ अवसर पर यह कथा कराई जाती है। जैसे कि जब नया घर लिया जाए, गृह प्रवेश हो, शादी या सगाई हो, नया व्यापार शुरू किया जाए या नौकरी लगने की खुशी में। माना जाता है कि ऐसे समय पर कथा कराने से कार्य सफल होता है और भगवान का आशीर्वाद बना रहता है।

    कई लोग अपनी किसी मनोकामना को पूरा करने के लिए भी सत्यनारायण कथा करवाते हैं। यदि कोई विशेष इच्छा हो, जैसे नौकरी, धन या परिवार से जुड़ी कोई कामना, तो संकल्प लेकर किसी भी दिन कथा की जा सकती है।

    व्रत और धार्मिक दिनों पर भी इस कथा का विशेष महत्व होता है। जैसे एकादशी, संक्रांति या अन्य पवित्र दिनों में इसे करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, परिवार के खास मौकों जैसे जन्मदिन, नामकरण या बच्चों की पढ़ाई या नए काम की शुरुआत पर भी कथा करवाई जाती है।

    जहां तक समय की बात है, कथा सुबह या शाम किसी भी शुभ समय पर की जा सकती है। सबसे जरूरी बात यह है कि मन साफ और श्रद्धा सच्ची हो।

    हालांकि, कुछ परिस्थितियों में कथा करने से बचना चाहिए, जैसे घर में सूतक (जन्म या मृत्यु के बाद का समय) चल रहा हो या मन पूरी तरह शांत और एकाग्र न हो।

    कुल मिलाकर, सत्यनारायण भगवान की कथा का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं है, बल्कि जीवन में सत्य, श्रद्धा और भक्ति को अपनाना है। जो व्यक्ति सच्चे मन से यह कथा करता है, उसके जीवन में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

    YE BHI PADHE