
रामायण की आरती भगवान श्रीराम की दिव्य कथा और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के प्रति श्रद्धा प्रकट करने वाली एक भक्तिमय स्तुति है। हिंदू धर्म में रामायण को केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन, सत्य, धर्म, प्रेम और कर्तव्य का मार्ग दिखाने वाला पवित्र ग्रंथ माना जाता है। रामायण की आरती हिंदी में (Ramayan Ki Aarti Lyrics in Hindi) पढ़ने और गाने से भक्त श्रीराम की महिमा का स्मरण करते हैं तथा रामायण की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। इस लेख में आप श्री रामायण जी की आरती के संपूर्ण लिरिक्स, उसके धार्मिक महत्व और आरती करने की विधि के बारे में जानेंगे।
धर्म ग्रंथों में रामायण को केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि साक्षात प्रभु श्री राम का वाङ्मय स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि रामायण की आरती का गान करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि मनुष्य जन्म-मरण के चक्र और पापों के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। आज के डिजिटल युग में बढ़ते तनाव के बीच, रामायण की आरती एक ‘मेडिटेशन’ की तरह काम करती है। इसमें प्रयुक्त शब्द और लय मस्तिष्क को शांत करने में सहायक होते हैं।
भवरोग की औषधि: गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसे ‘भव रोग’ (सांसारिक दुखों) की दवा (अमी की मूरि) बताया है। यदि आप प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करते हैं, तो यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ाता है और जीवन की चुनौतियों से लड़ने की शक्ति देता है।
कलिमल हरनी: इसका अर्थ है कि यह मन के विकारों को दूर करती है।
रामायण की आरती का आध्यात्मिक महत्व
रामायण भगवान राम की पावन लीलाओं का संकलन है। जब हम इसकी आरती करते हैं, तो हम अनजाने में उन सभी ऋषियों और देवताओं के साथ जुड़ जाते हैं जिन्होंने प्रभु की महिमा का गुणगान किया है।
- पाप मुक्ति: प्रतिदिन या रामनवमी जैसे विशेष अवसरों पर इसे गाने से सोए हुए भाग्य जागृत होते हैं।
- पुण्य फल: यह आरती ‘कलियुग’ के मल (गंदगी) को धोने वाली और मोक्ष की राह दिखाने वाली मानी गई है।
आरती श्री रामायण जी की (भावार्थ सहित)
आरती श्री रामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।।
अर्थ: हम श्री रामायण जी की आरती करते हैं, जो माता सीता के प्रिय प्रभु श्री राम की सुंदर कीर्ति का गान है।
गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बाल्मीकि बिग्यान बिसारद।। शुक सनकादिक शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी।।
अर्थ: इसकी महिमा का गान ब्रह्मा, नारद, वाल्मीकि, शुकदेव और स्वयं शेषनाग व माता सरस्वती करती हैं। हनुमान जी ने भी इसकी सुंदर कीर्ति का वर्णन किया है।
गावत बेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस।। मुनि जन धन संतान को सरबस। सार अंश सम्मत सब ही की।।
अर्थ: यह अठारह पुराणों, वेदों और छहों शास्त्रों का निचोड़ (रस) है। यह मुनियों का धन और भक्तों का सर्वस्व है।
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की।। दलनि रोग भव मूरि अमी की। तात मातु सब बिधि तुलसी की।।
अर्थ: यह कलियुग के पापों को हरने वाली और सांसारिक विषयों के मोह को कम करने वाली है। तुलसीदास जी के लिए यह आरती माता-पिता के समान रक्षा करने वाली है।
प्रभु श्री राम और माता जानकी की विशेष स्तुति
आरती के पश्चात इन मंत्रों का जाप करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है:
🔹 श्री राम स्तुति
नीलाम्बुज श्यामलकोमलांग सीता समारो पितवाम भागम्। पाणौ महासायक चारुचापं नमामि रामं रघुवंश नाथम्।। नीले कमल के समान कोमल शरीर वाले, जिनके बायीं ओर माता सीता विराजमान हैं, उन रघुवंश के नाथ श्री राम को मैं नमन करता हूँ।
🔸 श्री जानकी वंदना
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम्। सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम्।। सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार करने वाली, क्लेशों को हरने वाली और कल्याण करने वाली श्री राम की प्रिय माता सीता को मेरा प्रणाम है।
मुख्य बात जो आपको जाननी चाहिए
क्या आप जानते हैं? रामायण जी की आरती में “छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस” कहा गया है। इसका अर्थ है कि यदि आप बहुत सारे धार्मिक ग्रंथ नहीं पढ़ सकते, तो केवल रामायण का भक्तिपूर्वक पाठ या आरती करना ही पर्याप्त है।
जय श्री राम!
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