सनातन धर्म में भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, यानी जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव को प्रसन्न करने के लिए वैसे तो कई मंत्र और चालीसा हैं, लेकिन ‘उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम’ (Uma Pati Maheshwaram Namami Shiva Shankaram) एक ऐसी अलौकिक और शक्तिशाली स्तुति है, जिसमें न सिर्फ शिव जी के भव्य रूप का वर्णन है, बल्कि इसमें महादेव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का वास है।

Shiv Stuti: उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम
यदि आप मानसिक तनाव, पापों या जीवन के दुखों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो इस चमत्कारी शिव स्तुति का पाठ आपके जीवन को बदल सकता है। आइए जानते हैं इस संपूर्ण स्तुति के बोल (Lyrics) और इसका महत्व।
संपूर्ण शिव स्तुति लिरिक्स (Complete Shiv Stuti Lyrics in Hindi)
नीचे दी गई स्तुति का सस्वर पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है:
नमो भूत भूतनाथ नन्दीश्वर श्री हरे, बहत गंग शिरपरे, जटा उतंग फरफरे, हिमालये उमा सहित, शोभितं निरन्तरं, उमापति महेश्वरम, नमामि शिव शंकरम।।
त्रिताप पाप क्षारणं, प्रभाय धर्म धारणम, समस्त सृष्टि धारणम, मांगल्य मृत्यु कारणम, अगम अनादि आशुतोष, धुर्जटी धुरंधरम, उमापति महेश्वरम, नमामि शिव शंकरम।।
भले भभूत रंग में, रहत मस्त भंग में श्मशानघाट वासिनी भुत प्रेत संग में करंत हस्त घोरनाद, डमरू डडंकरम, उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम।।
गले भुजंग मुण्डमाल भाल चंद शोभितंम, मयंक भग्य दर्शकात्, भक्त चित लोभितंम, आनंदकंद ध्यान मस्त, ॐकार उच्चरम, उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम।
धरि त्रिशूल हाथ नाथ, दक्ष यज्ञ खंडितम, रेमंड घोर गर्गरम तान्डव नृत्य मण्डितम, देवाधिदेव दिव्य भव्य भासकम भयंकरम, उमा पति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम।।
अजर अमर त्रिपुर हरम, करम त्रिशूल धारणम, संसार पाश नाशनम भव व्याधि पार तारणम भजंत सर्व शिव हरे सुरासुरम धुरंधरम, उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम।।
सोमेश्वरा, नागेश्वरा, श्रीमल्लिकार्जुनेश्वरा महाकालं ममलेश्वरा धुश्मेशरा, विश्वेशरा, केदार, भीम, बैद्यनाथ, त्रयंबकम रामेश्वरम, उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम।।
प्रसन्न हो परम पिता, ये अनूपदान दायिताम, नमः शिवाय नमः शिवाय भक्त गुण गायितंम, नमः अलख निरंजनम श्याम मंगलम करम, उमा पति महेश्वरम नमामि शिव शंकर।।
इस स्तुति की 3 सबसे बड़ी विशेषताएं (जो इसे बनाती हैं खास)
- 12 ज्योतिर्लिंगों का पुण्य: इस स्तुति के सातवें श्लोक में सोमनाथ, महाकाल, केदारनाथ और काशी विश्वनाथ सहित भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के पवित्र नामों का समावेश है। इसका पाठ करने से घर बैठे 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का फल मिलता है।
- त्रितापों से मुक्ति: संसार के तीन ताप (दैहिक, दैविक और भौतिक कष्ट) और अनजाने में हुए पापों के शमन के लिए यह स्तुति अमोघ मानी गई है।
- सकारात्मक ऊर्जा: इसके शब्दों का उच्चारण (जैसे ‘डमरू डडंकरम’ और ‘ॐकार उच्चरम’) शरीर और चक्रों में एक अनोखा कंपन पैदा करता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
पाठ करने की सही विधि
अधिकतम लाभ के लिए सोमवार, प्रदोष व्रत, या शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके शिवलिंग के सामने या शिव जी की प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं। इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ इस स्तुति का सस्वर गान करें। पाठ के अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
स्तुति के रचयिता और इसकी उत्पत्ति (Writer / Composer Name)
इस दिव्य और अद्भुत शिव स्तुति के रचयिता के रूप में परम शिव भक्त श्रीमद आद्य शंकराचार्य या समकालीन संतों की अनन्य भक्ति परंपरा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मूल रूप से पारंपरिक ग्रंथों और शिव पुराण के भावों को समेटकर तैयार की गई यह स्तुति जन-मानस में ‘अनाम भक्त कवि’ की अद्भुत कृति मानी जाती है, जिसने महादेव के शांत और रौद्र दोनों ही रूपों को बड़ी खूबसूरती से शब्दों में पिरोया है। आज के समय में इस स्तुति को कई प्रसिद्ध भजनीकों और गायकों ने अपनी मधुर आवाज देकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया है।
‘उमापति महेश्वरम’ स्तुति का गूढ़ अर्थ (Deep Meaning of the Verses)
इस स्तुति का एक-एक शब्द भगवान शिव के विराट स्वरूप का साक्षात्कार कराता है:
- प्रथम चरण (स्वरूप वर्णन): इसमें महादेव को भूतनाथ (सभी जीवों के स्वामी), नन्दीश्वर और गंगा को जटाओं में धारण करने वाले हिमालय निवासी के रूप में नमन किया गया है, जो माता उमा (पार्वती) के साथ हमेशा सुशोभित रहते हैं।
- तांडव और रौद्र रूप: स्तुति में राजा दक्ष के यज्ञ विध्वंस का और डमरू के ‘डडंकरम’ नाद के साथ महादेव के महाविनाशकारी तांडव नृत्य का सजीव चित्रण है, जो अधर्म के नाश का प्रतीक है।
- अघोर रूप की महिमा: जो श्मशान के वासी हैं, भूत-प्रेतों की टोली जिनकी संगी है, और जो भस्म रमाकर भी परम आनंद (आनंदकंद) और ध्यान में मस्त रहते हैं, ऐसे औघड़दानी को इसमें प्रणाम किया गया है।
नियमित पाठ करने के चमत्कारी लाभ (Benefits of Chanting)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त प्रतिदिन या विशेषकर सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के दिन इस स्तुति का पाठ करता है, उसे निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
- अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति: ‘मांगल्य मृत्यु कारणम’ और ‘भव व्याधि पार तारणम’ पंक्तियों का पाठ करने से साधक को गंभीर रोगों, अकाल मृत्यु के भय और संसार के बंधनों (पाश) से मुक्ति मिलती है।
- मानसिक अवसाद और तनाव का नाश: भांग-धूत की मस्ती और ॐकार के उच्चारण का वर्णन मस्तिष्क को शांत करता है। यदि आप अत्यधिक तनाव या अवसाद (Depression) से गुजर रहे हैं, तो इसका सस्वर पाठ मन को अद्भुत शांति देता है।
- शीघ्र मनोकामना पूर्ति: चूंकि भगवान शिव ‘आशुतोष’ हैं (जो बहुत जल्दी मान जाते हैं), इसलिए इस स्तुति के माध्यम से मांगी गई जायज मनोकामनाएं महादेव की कृपा से बहुत जल्द पूरी हो जाती हैं।
FAQ
Q1. ‘उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम’ स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?
Ans: इस बेहद प्रभावशाली स्तुति का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। विशेष लाभ के लिए सोमवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि के दिन इसका सस्वर पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
Q2. क्या इस शिव स्तुति में 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम शामिल हैं?
Ans: जी हाँ, इस स्तुति के सातवें श्लोक में सोमनाथ, नागेश्वर, मल्लिकार्जुन, महाकाल, ममलेश्वर (ओंकारेश्वर), घृष्णेश्वर, विश्वनाथ, केदारनाथ, भीमशंकार, वैद्यनाथ, त्रयंबकेश्वर और रामेश्वरम सहित सभी 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का नाम एक साथ पिरोया गया है।
Q3. मानसिक शांति के लिए कौन सी शिव स्तुति सबसे बेस्ट है?
Ans: ‘उमापति महेश्वरम नमामि शिव शंकरम’ स्तुति में डमरू के नाद और ॐकार के उच्चारण का अद्भुत संगम है, जो मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगें पैदा करता है और मानसिक तनाव या अवसाद को तुरंत शांत करने में मदद करता है।
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