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ये भजन सोशल मीडिया पर मचा रहा है धमाल ! बोल लिखें हैं आलोक वत्स ने

    भक्ति संगीत की दुनिया में इन दिनों एक नया भजन लोगों के दिलों को गहराई से छू रहा है। “रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है” नामक यह भजन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। भजन के शब्द प्रसिद्ध गीतकार आलोक वत्स द्वारा लिखे गए हैं, जिनकी आध्यात्मिक सोच और सरल भाषा श्रोताओं को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित कर रही है।

    भजन की शुरुआत में ही छिपा है गहरा संदेश

    भजन की शुरुआती पंक्तियां—

    “वृन्दावन को वास मिले, काशी में मिले मौत,
    अवध नगर सुमिरन करूँ, राम नाम की जोत”

    जीवन, मृत्यु और प्रभु स्मरण के महत्व को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती हैं। यही कारण है कि यह भजन केवल एक गीत नहीं बल्कि जीवन का संदेश बनकर लोगों तक पहुंच रहा है।

    क्यों पसंद आ रहा है लोगों को यह भजन?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन की तलाश कर रहे हैं। ऐसे समय में यह भजन मनुष्य को उसके कर्मों और जीवन के वास्तविक उद्देश्य की याद दिलाता है।

    भजन की यह पंक्ति विशेष रूप से लोगों के हृदय को स्पर्श कर रही है—

    “जीवन भर राम न सिमिरा, अंत समय में रोता है”

    यह संदेश देता है कि जीवन के हर क्षण में ईश्वर का स्मरण करना कितना आवश्यक है।

    सोशल मीडिया पर मिल रहा जबरदस्त प्यार

    YouTube, Facebook, Instagram Reels और WhatsApp Status पर यह भजन तेजी से साझा किया जा रहा है। हजारों भक्त इसकी पंक्तियों को अपने स्टेटस और वीडियो में उपयोग कर रहे हैं। कम समय में ही इस भजन ने भक्ति प्रेमियों के बीच अपनी अलग पहचान बना ली है।

    आलोक वत्स की लेखनी की हो रही प्रशंसा

    भजन के बोल लिखने वाले आलोक वत्स की रचनात्मकता की लोग खुलकर सराहना कर रहे हैं। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे कठिन आध्यात्मिक संदेशों को भी बेहद सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करते हैं।

    भजन का मूल संदेश

    यह भजन मनुष्य को याद दिलाता है कि धन, वैभव और सांसारिक इच्छाएं क्षणिक हैं। अंततः केवल प्रभु का नाम और अच्छे कर्म ही साथ जाते हैं। भजन जीवन को सही दिशा देने और राम भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    (वृन्दावन को वास मिले , काशी में मिले मौत
    अवध नगर सुमिरन करूँ , राम नाम की जोत )

    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है
    जीवन भर राम न सिमिरा ,
    जीवन भर राम न सिमिरा , अंत समय में रोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है

    तूने कितने ख्वाब संजोये
    तूने कितने ख्वाब संजोये
    राम बिना कुछ भी न होये
    तूने कितने ख्वाब संजोये
    राम बिना कुछ भी न होये

    राम जो चाहें रे जोगी , इस दुनिया में वो होता है
    जीवन भर राम न सिमिरा , अंत समय में रोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है

    माटी की है काया तेरी
    माटी की है काया तेरी
    तुझको मिले न छाया तेरी
    माटी की है काया तेरी
    तुझको मिले न छाया तेरी

    फूल कहाँ से उपजेँगे , तू काटों को ही बोता है
    जीवन भर राम न सिमिरा , अंत समय में रोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है
    रे मन पाप की गठरी बोल भला क्यों ढोता है

    Re Man Paap Ki Gathri (English Translation)

    Verse (Opening)

    May I dwell in Vrindavan,
    May death come to me in Kashi,
    I remember the holy city of Ayodhya,
    And keep the lamp of Lord Rama’s name burning.


    Chorus

    O mind, why do you carry this bundle of sins?
    O mind, why do you carry this bundle of sins?
    You never remembered Lord Rama throughout your life,
    And now you weep at the final hour.
    O mind, why do you carry this bundle of sins?


    Verse 1

    You cherished countless dreams,
    You cherished countless dreams,
    But nothing happens without Lord Rama’s will.
    You cherished countless dreams,
    But nothing happens without Lord Rama’s will.

    Whatever Lord Rama desires, O seeker,
    That alone happens in this world.
    You never remembered Lord Rama throughout your life,
    And now you weep at the final hour.
    O mind, why do you carry this bundle of sins?


    Verse 2

    This body of yours is made of dust,
    This body of yours is made of dust,
    Even your own shadow may not remain with you.
    This body of yours is made of dust,
    Even your own shadow may not remain with you.

    How will flowers ever bloom,
    When all you sow are thorns?
    You never remembered Lord Rama throughout your life,
    And now you weep at the final hour.
    O mind, why do you carry this bundle of sins?


    Closing Chorus

    O mind, why do you carry this bundle of sins?
    O mind, why do you carry this bundle of sins?
    O mind, why do you carry this bundle of sins?


    Poetic Version (for international devotional audiences):

    O wandering mind, why bear the weight of sin?
    You forgot Lord Rama all your life,
    And now, at the end, your tears begin.
    Dreams are many, but His will prevails,
    This mortal body is but dust and trails.
    How can flowers bloom in your field of fate,
    When only thorns you cultivate?

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