
श्री राम जहाँ होंगे हनुमान वहां होंगे एक बेहद लोक प्रिय भजन है जिसे श्री ओम प्रकाश रुड़की जी ने लिखा है | “श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहाँ होंगे” भगवान श्रीराम और बजरंगबली हनुमान की अटूट भक्ति को समर्पित एक बेहद लोकप्रिय भजन है। इस भजन में श्रीराम को भक्ति, मर्यादा और धर्म के प्रतीक के रूप में तथा हनुमान जी को सेवा, शक्ति और संकटों से रक्षा करने वाले भक्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
Shri Ram Jahan Honge श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहाँ होंगे Lyrics
तर्ज – जब हम जवां होंगे
श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहां होंगे,
दोनों जहाँ होंगे, वहां कल्याण करेंगे,
हर काम बनेंगे, श्री राम जहाँ होंगे…….
श्री राम का जो भी, ध्यान लगाएगा,
बालाजी के दर्शन, वो ही पाएगा,
प्रभु राम की भक्ति से, तुम्हे हनुमान मिलेंगे,
कल्याण करेंगे, श्री राम जहाँ होंगे…..
भैरव बाबा प्रेत राज, की शक्ति से,
संकट कट जाते, बाला की भक्ति से,
मुश्किल सभी की, बालाजी आसान करेंगे,
कल्याण करेंगे, श्री राम जहाँ होंगे…….
डरते नहीं जो संकट से गर तिरो से,
बंध जाते यहाँ, आकर वो जंजीरो से,
मिट जायेंगे जो दुष्ट, यहाँ अभिमान करेंगे,
बेमौत मरेंगे, श्री राम जहाँ होंगे……
बड़े ही सच्चे, मेहंदीपुर के बालाजी,
बड़े दयालु अंजनी माँ, के लाला जी,
बैरागी पुरे सब के, ये अरमान करेंगे,
कल्याण करेंगे, श्री राम जहाँ होंगे…….
भक्त परंपरा में हनुमान जी को श्रीराम के परम भक्त के रूप में स्मरण किया जाता है। इसलिए जहां श्रीराम का नाम और स्मरण होता है, वहां हनुमान जी की भक्ति का भाव भी स्वाभाविक रूप से जुड़ जाता है। श्रीराम के प्रति हनुमान जी की निष्ठा रामायण की सबसे प्रेरणादायक भक्ति कथाओं में से एक है। हनुमान जी ने अपने बल, बुद्धि और सामर्थ्य को सदैव श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित किया।
भजन में भी यही भावना दिखाई देती है कि कठिन परिस्थितियों में भक्त हनुमान जी का स्मरण करता है और उनसे अपने जीवन के संकटों को दूर करने की प्रार्थना करता है।
इसी कारण मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ तथा श्रीराम नाम का स्मरण करने की परंपरा अनेक भक्तों में देखने को मिलती है।
भजन में भैरव बाबा और प्रेतराज का उल्लेख
इस भजन में भैरव बाबा और प्रेतराज का भी उल्लेख किया गया है। यह संदर्भ विशेष रूप से मेहंदीपुर बालाजी से जुड़ी लोक-आस्था और वहां प्रचलित धार्मिक मान्यताओं की ओर संकेत करता है।
भजन का मुख्य केंद्र हालांकि श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति ही है। इसके माध्यम से भक्त अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति और ईश्वर की कृपा की कामना करता है।
“श्री राम जहाँ होंगे, हनुमान वहाँ होंगे” का भावार्थ
इस भजन का मूल भाव बहुत सरल है—जहां श्रीराम का स्मरण और भक्ति है, वहां हनुमान जी की उपस्थिति और उनकी भक्ति का भाव भी माना जाता है।
श्रीराम धर्म और मर्यादा के आदर्श माने जाते हैं, जबकि हनुमान जी निस्वार्थ सेवा, समर्पण, साहस और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।
इसलिए यह भजन केवल भगवान की स्तुति नहीं करता, बल्कि भक्त को यह संदेश भी देता है कि जीवन में विश्वास, सेवा, साहस और धर्म के मार्ग को अपनाना चाहिए।
इस भजन का मूल संदेश यही है कि श्रीराम के प्रति भक्ति और हनुमान जी के प्रति समर्पण भक्त के भीतर विश्वास, साहस और सेवा की भावना को मजबूत कर सकता है।