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हनुमान जी ने क्यों पोत लिया था अपने पूरे शरीर पर सिंदूर? जानिए इस ‘सिंदूरी’ रूप के पीछे छिपी अद्भुत प्रेम कथा

    प्रणाम भक्तों! आज इस लेख में हम जानेंगे कि हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों लगाया था, माता सीता ने सिंदूर के बारे में क्या बताया था और बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है। साथ ही जानेंगे कि हनुमान जी की सिंदूर कथा हमें सच्ची भक्ति, प्रेम और समर्पण का क्या संदेश देती है।

    Hanuman ji ko sindoor kyun lagate hain
    Hanuman ji ko sindoor kyun lagate hain?

    आखिर क्यों लगाते है प्रभु हनुमान को सिन्दूर

    यह कहानी केवल एक परंपरा की नहीं है, बल्कि यह उस निश्छल और चरम भक्ति की कहानी है, जो एक भक्त अपने भगवान के प्रति रखता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा में कोई तर्क नहीं, सिर्फ समर्पण होता है।

    जब माता सीता को श्रृंगार करते देख चकित रह गए हनुमान – हनुमान जी की सिंदूर कथा

    कथा के अनुसार, त्रेतायुग में एक सुबह जब माता सीता अपना श्रृंगार कर रही थीं, तब हनुमान जी वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि माता ने अपनी उंगलियों से चुटकी भर सिंदूर लेकर अपनी मांग में लगाया है। हनुमान जी के लिए यह एक नई और अनोखी घटना थी।

    अपनी मासूमियत और जिज्ञासा के साथ उन्होंने माता से पूछा, “हे माता! यह लाल पदार्थ क्या है और आप इसे अपनी मांग में क्यों लगाती हैं?”

    माता सीता का जवाब और हनुमान जी का अनोखा तर्क

    माता सीता ने मुस्कुराते हुए हनुमान जी को समझाया, “पुत्र, यह सिंदूर है। इसे लगाने से तुम्हारे आराध्य, मेरे स्वामी श्री राम की आयु बढ़ती है और वे हमेशा सुरक्षित रहते हैं”। माता ने यह भी कहा कि जितना अधिक सिंदूर लगाया जाए, स्वामी की आयु उतनी ही लंबी और अक्षय होती है।

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    बस, हनुमान जी को अपनी समस्या का समाधान मिल गया। उनके मन में विचार आया कि यदि चुटकी भर सिंदूर से प्रभु राम की आयु बढ़ती है, तो अगर मैं अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लूं, तो मेरे स्वामी तो अमर हो जाएंगे!

    जब ‘सिंदूरी’ हनुमान पहुंचे श्री राम की राजसभा में

    भक्ति में डूबे हनुमान जी तुरंत बाजार गए और वहां से ढेर सारा सिंदूर लेकर अपने पूरे शरीर पर मल लिया। सिर से लेकर पैर तक वे पूरी तरह से नारंगी हो गए। इसी वेश में वे सीधे भगवान राम की भरी राजसभा में जा पहुंचे।

    जब ‘सिंदूरी’ हनुमान सभा में आए, तो उन्हें देखकर हर कोई दंग रह गया। भगवान श्री राम भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और मंद-मंद मुस्कुराते हुए पूछा, “कपिराज! आज आपने यह कैसा वेश बना लिया है?”

    हनुमान जी ने बड़ी सादगी से जवाब दिया, “प्रभु! माता ने कहा था कि सिंदूर लगाने से आपकी आयु बढ़ती है। इसलिए मैंने निश्चय किया कि मैं अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगा लूं ताकि आपको अनंत आयु प्राप्त हो और आप हमेशा सुरक्षित रहें”।

    भगवान राम का वरदान- क्यों खास है मंगलवार?

    हनुमान जी की इस सरल और निस्वार्थ भक्ति को देखकर भगवान राम अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने हनुमान जी को गले लगा लिया और उसी क्षण एक घोषणा की:

    1. मंगलवार का दिन: प्रभु ने घोषित किया कि ‘मंगलवार’ का दिन हनुमान का विशेष दिन होगा।
    2. मनोकामना की पूर्ति: जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ चमेली के तेल और सिंदूर को हनुमान जी को अर्पित करेगा, उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।
    3. राम की कृपा: सिंदूर चढ़ाने वाला व्यक्ति प्रभु श्री राम का विशेष प्रेम पात्र बनेगा।
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    प्रभु हनुमान को सिंदूर चढ़ाने के फायदे

    मंगलवार के दिन मंदिर जाकर हनुमान जी के दाहिने कंधे पर सिंदूर का तिलक लगाना शुभ माना जाता है। चाहें तो इस दिन चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर भी बजरंगबली को अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से साधक पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। ध्यान रखें कि हनुमान जी को हमेशा नारंगी सिंदूर ही चढ़ाना चाहिए।

    • भगवान खुश होते हैं: हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से वे खुश होते हैं और भक्तों के दुख दूर करते हैं। साथ ही भगवान राम की कृपा भी मिलती है।
    • संकट दूर होते हैं: इससे जीवन की परेशानियां, डर और नकारात्मक चीजें कम होने लगती हैं।
    • सुख-समृद्धि बढ़ती है: खासकर मंगलवार को सिंदूर चढ़ाने से घर में खुशहाली आती है, काम में रुकावट कम होती है और कर्ज से राहत मिल सकती है।
    • बीमारी और दोष कम होते हैं: सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने से शरीर और ग्रहों से जुड़े दोषों का असर कम होता है।

    हनुमान ही हैं राम भक्ति का द्वार

    हनुमान जी का यह सिंदूरी रूप हमें सिखाता है कि भगवान को पाने के लिए किसी बड़े पाखंड की नहीं, बल्कि एक बच्चे जैसी मासूमियत और समर्पण की जरूरत होती है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि जिस तरह किसी मंजिल तक पहुंचने के लिए मार्ग और वाहन की जरूरत होती है, उसी तरह श्री राम तक पहुंचने के लिए हनुमान जी की शरण में जाना अनिवार्य है।

    इसीलिए आज भी करोड़ों भक्त अपनी परेशानियों को दूर करने और प्रभु राम की कृपा पाने के लिए बजरंगबली को चोला (सिंदूर और तेल) चढ़ाते हैं।

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