नमामि शमीशान निर्वाण रूपम (Namami Shamishan Nirvan Roopam) भगवान शिव की स्तुति में रचित प्रसिद्ध रुद्राष्टकम् का पहला श्लोक है। यह स्तोत्र भगवान शिव के निराकार, निर्गुण, व्यापक और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करता है। परंपरागत रूप से रुद्राष्टकम् को गोस्वामी तुलसीदास से संबद्ध माना जाता है और संस्कृत दस्तावेज़ों के स्रोत में (Namami Shamishan Nirvan Roopam) “रुद्राष्टकम् अथवा शिवाष्टकम्” के रूप में दर्ज किया गया है।

रुद्राष्टकम् नाम क्यों पड़ा?
“अष्टकम्” का सामान्य अर्थ है आठ श्लोकों का समूह। रुद्राष्टकम् में भगवान रुद्र यानी शिव की स्तुति आठ श्लोकों में की गई है। इसलिए इसे रुद्राष्टकम् कहा जाता है।
यह स्तोत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो भगवान शिव की स्तुति को सरल संस्कृत पाठ और उसके हिंदी अर्थ के साथ पढ़ना चाहते हैं।
नमस्ते भक्तों! अगर आप भगवान शिव के अनन्य उपासक हैं, तो आपने ‘नमामीशमीशान निर्वाण रूपं’ (Namami Shamishan Nirvan Roopam) के दिव्य स्वर जरूर सुने होंगे। यह न केवल एक स्तोत्र है, बल्कि महादेव की स्तुति में गाया गया सबसे शक्तिशाली मंत्र है।
आज के इस विशेष ब्लॉग में हम श्री रुद्राष्टकम (Shri Rudrashtakam) के लिरिक्स, उसका अर्थ और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानेंगे। और आप अपनी सुविधा के लिए Namami Shamishan Nirvan Roopam PDF Download भी कर सकते हैं
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नमामीशमीशान निर्वाण रूपं (Namami Shamishan Nirvan Roopam) Hindi
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजे हं।।
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतो हं।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा।।
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालं।।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्।
त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजे हं भवानीपतिं भावगम्यं।।
कलातीत कल्याण कल्पांतकारी। सदासज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
न यावद् उमानाथ पादारविंदं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतो हं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं।
जराजन्म दु:खौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्न्मामीश शंभो।।
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये। ये पठन्ति नरा भक्तया तेषां शम्भु: प्रसीदति॥
Namami Shamishan Nirvan Roopam Lyrics In Hindi
Namameeshameeshaan nirvaanaroopam, vibhum vyaapakam brahmavedaswaroopam ।
Nijam nirgunam nirvikalpam nireeham, chidaakaashamaakaashavaasam bhajeham ॥
Niraakaaramonkaramoolam turiiyam, giraajnaana-goteetam-eesham gireesham ।
Karaalam mahaakaala-kaalam kripaalam, gunaagaarasansaarapaaram natoham ॥
Tushaaraadri-sankaasha-gauram gabheeram, manobhootakoti-prabhaashree shareeram ।
Sphuranmaulikallolini chaarugangaa, lasadbhaalabaalendu kanthe bhujangaa ॥
Chalatkundalam bhroosunetram vishaalam, prasannaananam neelakantham dayaalam ।
Mrigaadheeshacharmaambaram mundamaalam, priyam Shankaram sarvanaatham bhajaami ॥
Prachandam prakrishtam pragalbham paresham, akhandam ajam bhaanukotiprakasham ।
Tryahshoolanirmoolanam shoolapaanim, bhajeham Bhavaanipatim bhaavagamyam ॥
Kalaateetakalyaana kalpaantakaari, sadaa sajjanaanandadaataa puraari ।
Chidaanandasandoha mohaapahaari, praseed praseed prabho Manmathaari ॥
Na yaavad Umaanaatha-paadaaravindam, bhajantiha loke pare vaa naraanaam ।
Na taavatsukham shaanti santaapanasham, praseed prabho sarvabhootaadhivaasam ॥
Na jaanaami yogam japam naiva poojaam, natoham sadaa sarvadaa Shambhutubhyam ।
Jaraajanmaduhkhougha taatapyamaanam, prabho paahi aapannamaameesha Shambho ॥
Rudrashtakam idam proktam viprena haratoshaye ।
Ye pathanti nara bhaktya teshaam Shambhuh praseedati ॥
Rudrashtakam idam proktam viprena haratoshaye ।
Ye pathanti nara bhaktya teshaam Shambhuh praseedati ॥
Namami Shamishan Nirvan Roopam PDF Download
अक्सर भक्त मंदिर में या पूजा के समय पाठ करने के लिए PDF की तलाश करते हैं। आप नीचे दिए गए लिंक (सांकेतिक) से Namami Shamishan Nirvan Roopam Lyrics in Hindi PDF डाउनलोड कर सकते हैं ताकि आप बिना इंटरनेट के भी महादेव की स्तुति कर सकें।
नमामि शमीशान निर्वाण रूपम का पाठ कब करें?
भगवान शिव की पूजा के लिए किसी एक समय को ही अनिवार्य मानना जरूरी नहीं है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार शांत वातावरण में रुद्राष्टकम् का पाठ कर सकते हैं।
सुबह पूजा के समय पाठ करना एक सामान्य तरीका है। इसके अलावा सोमवार या शिव-उपासना से जुड़े विशेष दिनों में भी कई लोग भगवान शिव की स्तुति करते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि पाठ जल्दबाजी में करने के बजाय शांत मन से किया जाए और श्लोकों को समझने का प्रयास किया जाए।
रुद्राष्टकम् का पाठ कैसे करें?
रुद्राष्टकम् का पाठ करने के लिए किसी कठिन प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। आप स्नान आदि के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठ सकते हैं। भगवान शिव का स्मरण करें, दीपक जलाएं और श्रद्धा से स्तोत्र का पाठ करें।
अगर आपके पास पूजा की पूरी सामग्री उपलब्ध नहीं है, तब भी आप केवल भगवान शिव का ध्यान करके पाठ कर सकते हैं। भक्ति में सबसे महत्वपूर्ण बात मन की श्रद्धा और एकाग्रता है।
रुद्राष्टकम् का पाठ करने का महत्व
भगवान शिव के भक्तों के लिए रुद्राष्टकम् केवल संस्कृत के कुछ श्लोक नहीं हैं, बल्कि शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है।
इसमें भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण किया गया है। इसलिए कई भक्त इसे पूजा, ध्यान या नियमित शिव-भक्ति के समय पढ़ते हैं।
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि इससे जुड़े धार्मिक लाभों को धार्मिक मान्यता और आस्था के रूप में ही समझना चाहिए।
रुद्राष्टकम् के प्रत्येक श्लोक में क्या बताया गया है?
रुद्राष्टकम् के आठों श्लोकों में भगवान शिव की अलग-अलग विशेषताओं का वर्णन मिलता है। कहीं उनके निराकार स्वरूप का स्मरण है, तो कहीं उनके प्रसिद्ध स्वरूप और गुणों का वर्णन मिलता है।
इसलिए इस article में केवल पूरा पाठ देने के बजाय प्रत्येक श्लोक के नीचे उसका आसान हिंदी भावार्थ देना पाठक के लिए ज्यादा उपयोगी रहेगा।
इससे वह केवल “नमामि शमीशान निर्वाण रूपम Lyrics” पढ़कर वापस नहीं जाएगा, बल्कि पूरे स्तोत्र का भाव भी समझ पाएगा।
नमामि शमीशान निर्वाण रूपम और रुद्राष्टकम् में क्या अंतर है?
यह सवाल बहुत से पाठकों के मन में आ सकता है। आसान भाषा में समझें तो “नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्” रुद्राष्टकम् की शुरुआती पंक्ति है।
पूरे आठ श्लोकों वाले स्तोत्र को रुद्राष्टकम् कहा जाता है। इसलिए जब कोई “नमामि शमीशान निर्वाण रूपम” खोजता है, तो वह आमतौर पर इसी रुद्राष्टकम् के पाठ को ढूंढ रहा होता है।
नमामि शमीशान का सही उच्चारण कैसे करें?
संस्कृत के शब्द पहली बार पढ़ते समय कई लोगों को उच्चारण में परेशानी होती है। इसलिए पाठ को धीरे-धीरे पढ़ना बेहतर है।
विशेषकर “नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्” जैसे शब्दों को जल्दबाजी में पढ़ने के बजाय पहले एक-दो बार देखकर समझ लें। अगर संभव हो तो किसी विश्वसनीय पाठ या उच्चारण के माध्यम से सुनकर भी अभ्यास किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नमामि शमीशान निर्वाण रूपम क्या है?
यह रुद्राष्टकम् की शुरुआती पंक्ति है, जिसमें भगवान शिव को नमन किया गया है।
नमामि शमीशान निर्वाण रूपम किस स्तोत्र का हिस्सा है?
यह भगवान शिव की स्तुति रुद्राष्टकम् का हिस्सा है।
नमामि शमीशान निर्वाण रूपम का हिंदी अर्थ क्या है?
इसमें भगवान शिव के दिव्य, व्यापक और निर्वाण स्वरूप को नमन करने का भाव व्यक्त किया गया है।
क्या नमामि शमीशान का PDF मिल सकता है?
हां, इस पेज पर रुद्राष्टकम् का PDF उपलब्ध कराया जा सकता है, जिसमें संपूर्ण पाठ और चाहें तो हिंदी अर्थ भी दिया जा सकता है।
रुद्राष्टकम् में कितने श्लोक हैं?
रुद्राष्टकम् आठ श्लोकों का स्तोत्र है।
रुद्राष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?
भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इसका पाठ कर सकते हैं। सुबह पूजा के समय या सोमवार जैसे शिव-उपासना के दिनों में इसका पाठ करना सामान्य रूप से किया जाता है।
रुद्राष्टकम और शिव तांडव स्तोत्र में क्या अंतर है?
रुद्राष्टकम शांत और भक्ति रस से भरपूर है, जबकि शिव तांडव स्तोत्र (रावण रचित) महादेव के तांडव और शक्ति का प्रदर्शन करता है।
क्या इसे रोज़ पढ़ना चाहिए?
हाँ, इसके नियमित पाठ से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक तनाव दूर होता है।
Namami Shamishan Nirvan Roopam का अर्थ क्या है?
इसका सरल अर्थ है—”मैं मोक्ष स्वरूप, सर्वव्यापक, ब्रह्म स्वरूप, ईशान दिशा के स्वामी भगवान शिव को प्रणाम करता हूँ।”
महादेव तो भोले हैं, वे केवल भाव के भूखे हैं। चाहे आप Namami Shamishan Nirvan Roopam Mp3 Download करके सुनें या स्वयं शुद्ध उच्चारण के साथ इसका पाठ करें, भगवान शिव आपकी पुकार अवश्य सुनेंगे।
हर हर महादेव!