
64 भैरवों के नाम हिंदी में: भगवान शिव के भैरव स्वरूप का नाम आते ही बाबा काल भैरव की छवि मन में आती है। कई श्रद्धालु मंदिरों में उनके दर्शन करते हैं, भैरव अष्टकम का पाठ करते हैं और भगवान भैरव के अलग-अलग स्वरूपों के बारे में जानना चाहते हैं। इसी क्रम में एक सवाल अक्सर पूछा जाता है—भगवान भैरव के 64 नाम कौन-कौन से हैं
हिंदू धर्म की शैव परंपरा में भगवान भैरव के अनेक स्वरूपों का वर्णन मिलता है। इनमें अष्ट भैरव और चतुःषष्टि भैरव नामावली विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। चतुःषष्टि का अर्थ है 64। इस नामावली में भगवान भैरव के नामों का पाठ किया जाता है।
इस लेख में भगवान भैरव के 64 नाम हिंदी और English में दिए गए हैं। साथ ही, अष्ट भैरव कौन हैं, 64 भैरवों की मान्यता क्या है और इन नामों का धार्मिक महत्व क्या माना जाता है, यह भी जानेंगे।
भगवान भैरव के 64 नाम कौन-कौन से हैं?
भगवान भैरव के 64 नामों की एक प्रचलित नामावली को भैरव चतुःषष्टि नामावली (Bhairava Chatuhshashti Namavali) कहा जाता है। संस्कृत में इस नामावली का संबंध रुद्रयामल तंत्र से संबद्ध चतुःषष्टिरूप भैरव स्तोत्र से बताया गया है।
इस पाठ में असितांग, विशालाक्ष, मार्तंड, रुरु, चंड, कपाल और संहार जैसे नाम आते हैं। नामावली के कुछ प्रकाशित संस्करणों में नामों की वर्तनी और उनके विभाजन में अंतर मिलता है। इसलिए धार्मिक पाठ के लिए किसी विश्वसनीय संस्कृत संस्करण का अनुसरण करना उचित है।
64 भैरवों के नाम हिंदी और English में
नीचे एक प्रचलित संस्कृत नामावली के अनुसार भगवान भैरव के नाम दिए गए हैं। English में उनके नामों की वर्तनी उच्चारण समझने में सहायता के लिए दी गई है।
भगवान भैरव के नाम 1 से 16
- असितांग भैरव — Asitanga Bhairava
- विशालाक्ष भैरव — Vishalaksha Bhairava
- मार्तंड भैरव — Martanda Bhairava
- मोदकप्रिय भैरव — Modakapriya Bhairava
- स्वच्छंद भैरव — Svachchanda Bhairava
- विघ्नसंतुष्ट भैरव — Vighnasantushta Bhairava
- खेचर भैरव — Khechara Bhairava
- सचराचर भैरव — Sacharachara Bhairava
- रुरु भैरव — Ruru Bhairava
- क्रोडदंष्ट्र भैरव — Krodadamshtra Bhairava
- जटाधर भैरव — Jatadhara Bhairava
- विश्वरूप भैरव — Vishvarupa Bhairava
- विरूपाक्ष भैरव — Virupaksha Bhairava
- नानारूपधर भैरव — Nanarupadhara Bhairava
- पर भैरव — Para Bhairava
- वज्रहस्त भैरव — Vajrahasta Bhairava
भगवान भैरव के नाम 17 से 32
- महाकाय भैरव — Mahakaya Bhairava
- चंड भैरव — Chanda Bhairava
- प्रलयांतक भैरव — Pralayantaka Bhairava
- भूमिकंप भैरव — Bhumikampa Bhairava
- नीलकंठ भैरव — Nilakantha Bhairava
- विष्णु भैरव — Vishnu Bhairava
- कुलपालक भैरव — Kulapalaka Bhairava
- मुंडमाल भैरव — Mundamala Bhairava
- कामपाल भैरव — Kamapala Bhairava
- क्रोध भैरव — Krodha Bhairava
- पिंगलेक्षण भैरव — Pingalekshana Bhairava
- उग्ररूप भैरव — Ugrarupa Bhairava
- धरापाल भैरव — Dharapala Bhairava
- कुटिल भैरव — Kutila Bhairava
- मंत्रनायक भैरव — Mantranayaka Bhairava
- रुद्र भैरव — Rudra Bhairava
भगवान भैरव के नाम 33 से 48
- पितामह भैरव — Pitamaha Bhairava
- उन्मत्त भैरव — Unmatta Bhairava
- वटुनायक भैरव — Vatunayaka Bhairava
- शंकर भैरव — Shankara Bhairava
- भूतवेताल भैरव — Bhutavetala Bhairava
- त्रिनेत्र भैरव — Trinetra Bhairava
- त्रिपुरांतक भैरव — Tripurantaka Bhairava
- वरद भैरव — Varada Bhairava
- पर्वतावास भैरव — Parvatavasa Bhairava
- कपाल भैरव — Kapala Bhairava
- शशिभूषण भैरव — Shashibhushana Bhairava
- हस्तिचर्माम्बरधर भैरव — Hasticharmambaradhara Bhairava
- योगीश भैरव — Yogisha Bhairava
- ब्रह्मराक्षस भैरव — Brahmarakshasa Bhairava
- सर्वज्ञ भैरव — Sarvajna Bhairava
- सर्वदेवेश भैरव — Sarvadevesha Bhairava
भगवान भैरव के नाम 49 से 64
- सर्वभूतहृदिस्थित भैरव — Sarvabhutahridisthita Bhairava
- भीषण भैरव — Bhishana Bhairava
- भयहर भैरव — Bhayahara Bhairava
- सर्वज्ञ भैरव — Sarvajna Bhairava
- कालाग्नि भैरव — Kalagni Bhairava
- महारौद्र भैरव — Maharaudra Bhairava
- दक्षिण भैरव — Dakshina Bhairava
- मुखर भैरव — Mukhara Bhairava
- अस्थिर भैरव — Asthira Bhairava
- संहार भैरव — Samhara Bhairava
- अतिरिक्तांग भैरव — Atiriktanga Bhairava
- कालाग्नि भैरव — Kalagni Bhairava
- प्रियंकर भैरव — Priyankara Bhairava
- घोरनाद भैरव — Ghoranada Bhairava
- विशालांग भैरव — Vishalanga Bhairava
- दक्षसंस्थित भैरव — Dakshasamsthita Bhairava
नामावली के बारे में जरूरी जानकारी: संस्कृत के प्रकाशित पाठों में सर्वज्ञ और योगीश जैसे नामों की पुनरावृत्ति तथा कुछ नामों के संयुक्त या अलग पाठ मिलते हैं। ऊपर दी गई सूची को एक प्रचलित पाठ के आधार पर पढ़ें; सभी परंपराओं में नामों का एक ही क्रम होना आवश्यक नहीं है।
अष्ट भैरव कौन-कौन से हैं?
भगवान भैरव के आठ प्रमुख स्वरूपों को अष्ट भैरव कहा जाता है। शैव परंपरा में इनका विशेष महत्व है। कुछ धार्मिक ग्रंथों और उपासना परंपराओं में इनका संबंध आठ दिशाओं से भी जोड़ा जाता है।
अष्ट भैरव के प्रचलित नाम हैं:
- असितांग भैरव
- रुरु भैरव
- चंड भैरव
- क्रोध भैरव
- उन्मत्त भैरव
- कपाल भैरव
- भीषण भैरव
- संहार भैरव
अष्ट भैरव और 64 भैरवों की अवधारणाएं संबंधित हैं, लेकिन दोनों की सूचियों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। अष्ट भैरव आठ प्रमुख स्वरूपों का उल्लेख करते हैं, जबकि 64 भैरवों की परंपरा अधिक विस्तृत है।
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भगवान भैरव के 64 नामों का क्या महत्व है?
भगवान भैरव के नामों का पाठ भक्तों के लिए श्रद्धा और उपासना का माध्यम है। कई लोग अपनी दैनिक पूजा में भगवान शिव और बाबा काल भैरव का स्मरण करते हैं। कुछ श्रद्धालु विशेष अवसरों पर भैरव नामावली या भैरव अष्टकम का पाठ भी करते हैं।
भैरव उपासना को धार्मिक परंपराओं में साहस, अनुशासन, आत्मचिंतन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा से जोड़ा जाता है। भक्त भगवान भैरव से जीवन में सही निर्णय लेने, कठिनाइयों का सामना करने और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
इन नामों के प्रत्येक स्वरूप का अलग अर्थ बताने के लिए संबंधित संस्कृत पाठ और उसकी टीका का अध्ययन जरूरी है। इसलिए बिना प्रमाण के हर नाम के लिए कोई निश्चित फल या विशेष चमत्कार बताना उचित नहीं होगा।
भगवान भैरव के नामों का पाठ कैसे करें?
यदि आप भगवान भैरव की नामावली का पाठ करना चाहते हैं, तो अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
- पूजा के स्थान को स्वच्छ रखें।
- भगवान शिव या बाबा काल भैरव का स्मरण करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार दीपक जलाकर प्रार्थना करें।
- नामावली को शांत मन से पढ़ें।
- अंत में सद्बुद्धि, साहस और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।
विशेष तांत्रिक साधनाओं की विधि अलग हो सकती है। ऐसी साधना करने से पहले संबंधित परंपरा के योग्य जानकार से मार्गदर्शन लेना उचित है।
64 भैरवों से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भगवान भैरव के 64 नाम कौन-कौन से हैं?
भगवान भैरव के 64 नामों की एक प्रचलित सूची भैरव चतुःषष्टि नामावली कहलाती है। इसमें असितांग, विशालाक्ष, मार्तंड, रुरु, चंड, कपाल और संहार सहित अनेक नाम आते हैं। ऊपर लेख में नाम हिंदी और English में दिए गए हैं।
2. अष्ट भैरव कौन-कौन से हैं?
अष्ट भैरव के प्रचलित नाम असितांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण और संहार भैरव हैं। अलग-अलग ग्रंथों में नामों के क्रम और विवरण में अंतर मिल सकता है।
3. क्या 64 भैरव और अष्ट भैरव एक ही हैं?
नहीं। अष्ट भैरव भगवान भैरव के आठ प्रमुख स्वरूपों की अवधारणा है। 64 भैरवों की मान्यता अधिक विस्तृत है और कुछ परंपराओं में 64 नामों की नामावली के रूप में भी मिलती है।
4. क्या काल भैरव और बटुक भैरव अलग हैं?
काल भैरव और बटुक भैरव भगवान भैरव के अलग-अलग पूजित स्वरूप हैं। काल भैरव को समय के अधिपति और रक्षक स्वरूप से विशेष रूप से जोड़ा जाता है, जबकि बटुक भैरव बालक स्वरूप में पूजे जाते हैं।
5. क्या भगवान भैरव के 64 नामों का पाठ घर पर किया जा सकता है?
भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार भगवान भैरव की नामावली का पाठ कर सकते हैं। किसी विशेष तांत्रिक अनुष्ठान के लिए संबंधित परंपरा के योग्य जानकार से मार्गदर्शन लेना उचित है।
निष्कर्ष
भगवान भैरव के 64 नाम शैव उपासना की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा से जुड़े हैं। भैरव चतुःषष्टि नामावली के माध्यम से भक्त भगवान भैरव के विभिन्न नामों से परिचित होते हैं। अष्ट भैरव की मान्यता भी भगवान शिव के भैरव स्वरूप को समझने में सहायता करती है।
यदि आप भगवान भैरव की उपासना करते हैं, तो नामावली का पाठ अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार कर सकते हैं। संस्कृत नामों के सही पाठ के लिए विश्वसनीय स्रोत का उपयोग करें।
जय बाबा काल भैरव। हर हर महादेव।