
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram) माँ दुर्गा की शक्ति, साहस और दिव्य स्वरूप की स्तुति करने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय संस्कृत स्तोत्र है। इसकी शुरुआत प्रसिद्ध पंक्तियों “अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते” से होती है, इसलिए इसे अयि गिरिनन्दिनि स्तोत्रम् (Aigiri Nandini Stotram) के नाम से भी जाना जाता है।
इस स्तोत्र में माँ दुर्गा के महिषासुर का वध करने वाले शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन मिलता है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका पाठ करके माँ दुर्गा का स्मरण करते हैं। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य शुभ अवसरों पर इसका पाठ विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसकी ओजपूर्ण संस्कृत पंक्तियाँ मन में भक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का भाव जगाती हैं।
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् – अयि गिरिनन्दिनि
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ दुर्गा! आप समस्त पृथ्वी को आनंद प्रदान करने वाली हैं और पूरे संसार को सुख देने वाली हैं। नंदी द्वारा आपकी स्तुति की जाती है। आप विंध्य पर्वत की ऊँची चोटियों पर निवास करने वाली तथा भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति हैं। देवताओं द्वारा भी आपकी प्रशंसा की जाती है।
हे भगवती! आप भगवान शिव (नीलकंठ) के परिवार की शोभा हैं। आप विशाल परिवार वाली और अनेक प्रकार से संसार का कल्याण करने वाली हैं। हे महिषासुर का वध करने वाली माँ! हे सुंदर जटाओं वाले भगवान शिव की प्रिय अर्धांगिनी और पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आप श्रेष्ठ देवताओं पर अपनी कृपा और आशीर्वाद की वर्षा करने वाली हैं। आप उन शक्तिशाली दुष्टों का दमन करती हैं, जिन्हें पराजित करना कठिन है। आप दुष्ट स्वभाव वाले शत्रुओं के अहंकार को सहन नहीं करतीं और आनंद में रमण करती हैं।
हे देवी! आप तीनों लोकों का पालन-पोषण करने वाली, भगवान शंकर को प्रसन्न करने वाली और भक्तों के पापों तथा बुराइयों को दूर करने वाली हैं। आप अपनी महिमा के दिव्य घोष से संसार को गुंजायमान करती हैं।
हे समुद्र की पुत्री! आप दानवों के क्रोध और अत्याचार का नाश करने वाली, दिति के पुत्रों अर्थात् दैत्यों का दमन करने वाली और दुष्टों के अहंकार को चूर करने वाली हैं। हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की सुंदर जटाओं से सुशोभित स्वरूप की प्रिय देवी, हे हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे संपूर्ण जगत की माता! हे मेरी माँ! आप कदंब के वनों में निवास करना पसंद करती हैं और सदा आनंदमय मुस्कान से सुशोभित रहती हैं। आप पर्वतों के मुकुटस्वरूप ऊँचे हिमालय की चोटियों के मध्य अपने दिव्य धाम में विराजमान हैं।
हे मधुर स्वरूप वाली माँ! आपने मधु और कैटभ नामक दानवों का संहार करके देवताओं की रक्षा की। आप दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और दिव्य आनंद में रमण करने वाली हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे सुंदर जटाओं वाले भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
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अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपने अपने प्रचंड पराक्रम से शत्रुओं के विशाल गजराजों को परास्त किया और उनके मस्तकों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया। आप सिंह के समान अत्यंत शक्तिशाली और निर्भीक हैं, जो शत्रुओं के हाथियों के गंडस्थलों को चीरने की क्षमता रखती हैं।
हे रणभूमि में वीरता दिखाने वाली देवी! आपने अपनी भुजाओं के बल से शत्रु योद्धाओं को पराजित किया, उनके अस्त्र-शस्त्रों को तोड़ दिया और उनके मस्तकों को धराशायी कर दिया।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आप युद्ध में अहंकार से चूर शत्रुओं का संहार करने के लिए प्रकट होने वाली अद्भुत शक्ति से संपन्न हैं। आपकी शक्ति इतनी प्रबल है कि बड़े-बड़े देवताओं के लिए भी उसका सामना करना कठिन है।
हे देवी! आप अपनी बुद्धिमत्ता और विवेक से कठिन से कठिन परिस्थितियों का समाधान करने वाली हैं। भगवान महादेव के आदेश पर चलने वाले प्रमथगणों की अधिष्ठात्री के रूप में भी आपकी महिमा वर्णित है।
आप पापपूर्ण कार्य करने वालों, बुरी इच्छाएँ रखने वालों, दुष्ट विचारों वाले लोगों और दानवों का अंत करने वाली हैं। आपका संकल्प अधर्म और बुराई का विनाश करके धर्म की रक्षा करना है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे सुंदर जटाओं वाले भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, आप उन्हें अभय प्रदान करती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। आप अपने वीरतापूर्ण पराक्रम से शत्रुओं का संहार करने वाली तथा साहसी योद्धाओं को विजय और निर्भयता प्रदान करने वाली हैं।
हे देवी! आपके हाथों में सुशोभित पवित्र त्रिशूल तीनों लोकों में आपकी अद्भुत शक्ति का प्रतीक है। आप अपने त्रिशूल से दुष्ट शक्तियों और अधर्म का विनाश करती हैं तथा संसार में धर्म की स्थापना करती हैं।
जब देवताओं के नगाड़े विजय के उल्लास में गूँजते हैं, तब उनकी गगनभेदी ध्वनि से सभी दिशाएँ गुंजायमान हो उठती हैं। यह दिव्य नाद माँ दुर्गा की विजय, उनके पराक्रम और दुष्ट शक्तियों पर धर्म की जीत का गुणगान करता है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपने केवल अपनी हुंकार से धूम्रलोचन नामक भयंकर दानव का संहार कर दिया। आपकी दिव्य शक्ति के सामने बड़े-बड़े दानव भी टिक नहीं सके।
हे देवी! आपने युद्धभूमि में रक्तबीज जैसे शक्तिशाली दानव का सामना किया। रक्तबीज को वरदान प्राप्त था कि उसके रक्त की प्रत्येक बूंद धरती पर गिरने से एक नया रक्तबीज उत्पन्न हो जाता था। आपने अपनी अद्भुत युद्ध-कुशलता से उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोककर उसका अंत किया और संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया।
हे माँ! आपने शुम्भ और निशुम्भ जैसे महाबलशाली असुरों के साथ भीषण युद्ध करके उनका संहार किया। आपके इस प्रचंड युद्ध में दुष्ट शक्तियों का अंत हुआ और देवताओं को भय से मुक्ति मिली।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
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धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! युद्धभूमि में जब आप धनुष धारण करके शत्रुओं का सामना करती हैं, तब आपके अंगों पर सुशोभित कंगन और आभूषण युद्ध की गति के साथ झंकृत होने लगते हैं। आपका तेजस्वी स्वरूप और युद्ध-कौशल शत्रुओं के हृदय में भय उत्पन्न करता है।
हे स्वर्ण के समान आभा वाली देवी! आपके तरकश में रखे बाण और आपके तीव्र प्रहार शत्रु योद्धाओं को परास्त करते हैं। आपके अद्भुत पराक्रम के सामने शत्रुओं के श्रेष्ठ योद्धा भी टिक नहीं पाते।
हे माँ! आपकी सेना हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकों सहित चतुरंगिणी सेना के रूप में युद्धभूमि में आगे बढ़ती है। रणभूमि में अनेक प्रकार के सैनिकों की हलचल, शस्त्रों की ध्वनि और वीरों की गर्जना गूँजती है। आपके नेतृत्व में धर्म की रक्षा के लिए भयंकर युद्ध होता है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! स्वर्ग की सुंदर देवांगनाएँ आपके सम्मान और विजय के उत्सव में मनमोहक नृत्य करती हैं। वे अपने नृत्य में सुंदर भाव-भंगिमाएँ और आकर्षक मुद्राएँ प्रस्तुत करके वातावरण को आनंदमय बना देती हैं।
हे देवी! नृत्य के साथ विभिन्न तालों और लयबद्ध बोलों की मधुर ध्वनि गूँजती है। संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से देवताओं का उत्सव और भी आनंदपूर्ण हो जाता है।
मृदंग और अन्य वाद्ययंत्रों से निकलने वाली गंभीर तथा लयबद्ध ध्वनियाँ चारों ओर गूँजती हैं। उनकी ताल पर देवांगनाएँ नृत्य करती हैं और माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करती हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! संपूर्ण संसार आपकी जय-जयकार करता है। देवता और भक्त निरंतर आपकी विजय का गुणगान करते हैं तथा आपकी स्तुति में लीन रहते हैं। आप समस्त जगत द्वारा वंदित हैं और आपकी महिमा का वर्णन करना किसी के लिए भी आसान नहीं है।
हे देवी! आपके पैरों में बँधे नूपुरों की झंकार — झण-झण, झिञ्झिमि — इतनी मधुर और मनमोहक है कि भगवान शिव सहित उनके गण भी उस दिव्य ध्वनि से मोहित हो जाते हैं।
हे माँ! आप नृत्य, संगीत और सुंदर कलाओं में आनंद लेने वाली हैं। भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप तथा उनके दिव्य नृत्य की छटा भी आपके महिमामय स्वरूप से जुड़ी हुई है। नृत्य की लय, मधुर गायन और संगीत के माध्यम से आपकी दिव्य महिमा प्रकट होती है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपके दिव्य स्वरूप की आभा अत्यंत सुंदर और मनमोहक है। आप फूलों के समान कोमल, पवित्र और मन को आनंदित करने वाली हैं। आपकी अनुपम सुंदरता और दिव्य तेज भक्तों के हृदय को आकर्षित करते हैं।
हे देवी! आपकी शोभा रात्रि के समान शांत और मनमोहक है। आपका मुख चंद्रमा के समान सुंदर प्रतीत होता है और आपकी दिव्य छवि अंधकार में भी प्रकाश फैलाने वाली है। आप अपने भक्तों को शांति, आश्रय और सुख प्रदान करती हैं।
हे सुंदर नेत्रों वाली माँ! आपकी आँखों की छटा अत्यंत आकर्षक है। आपकी दिव्य सुंदरता के सामने भ्रमर भी मानो मोहित हो जाते हैं और आपके सौंदर्य की ओर खिंचे चले आते हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आप भीषण युद्ध में महान योद्धाओं और मल्लों (पहलवानों) के साथ युद्ध करने में निपुण हैं। आप अपने अद्भुत पराक्रम से शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त करती हैं और युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करती हैं।
हे देवी! आप लताओं, फूलों और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों से सुशोभित वातावरण में विराजमान हैं। आपके आसपास विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु और प्रकृति की सुंदरता आपके दिव्य स्वरूप की शोभा बढ़ाते हैं।
हे माँ! शीतलता और सुंदरता से खिले हुए लाल-लाल कोमल पल्लवों (नई पत्तियों) के समान आपका स्वरूप मनमोहक है। आपकी दिव्य आभा प्रकृति की सुंदरता और कोमलता को भी मात देती है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपके स्तोत्र में मद से झूमते विशाल और शक्तिशाली हाथियों का चित्रण मिलता है, जिनके गंडस्थलों से मद बह रहा है। ये हाथी अपनी विशालता और पराक्रम से युद्धभूमि की शोभा बढ़ाते हैं।
हे देवी! आप तीनों लोकों का आभूषण हैं। आप दिव्य कलाओं, सौंदर्य और ऐश्वर्य की निधि हैं। आपका स्वरूप सुंदरता के अथाह सागर के समान है और आप राजकुमारी के समान दिव्य तेज से सुशोभित हैं।
हे माँ! आपका मनमोहक स्वरूप सबके हृदय को आकर्षित करता है। आपकी सुंदरता और मधुरता ऐसी है कि कामदेव के समान आकर्षण रखने वाले भी आपकी दिव्य आभा के सामने नतमस्तक हो जाते हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपके ललाट की आभा कमल की पंखुड़ियों के समान निर्मल, कोमल और मनमोहक है। आपकी दिव्य सुंदरता और तेज ऐसा है, मानो आपके मस्तक पर पवित्रता और सौंदर्य की अनुपम छटा बिखरी हुई हो।
हे देवी! आप समस्त कलाओं, सौंदर्य और दिव्य लीलाओं की अधिष्ठात्री हैं। आपके सुंदर निवास के आसपास हंसों के समूह क्रीड़ा करते हुए विचरण करते हैं। उनका मनमोहक व्यवहार आपके दिव्य धाम की शोभा को और बढ़ाता है।
आपके आसपास खिले हुए नीले कमलों के समूह और उन पर मंडराते भौंरों की पंक्तियाँ एक सुंदर प्राकृतिक दृश्य प्रस्तुत करती हैं। सुगंधित बकुल के फूलों और भ्रमरों से सजा यह वातावरण आपकी अनुपम सुंदरता और दिव्य वैभव का प्रतीक है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
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करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपके हाथों में बजने वाली मुरली की मधुर ध्वनि इतनी मनमोहक है कि उसकी तुलना में कोयल का मधुर स्वर भी फीका पड़ जाता है। आपकी मधुरता और दिव्य संगीत से प्रकृति का वातावरण आनंदमय हो उठता है।
हे देवी! पर्वतों की सुंदर एकांत घाटियों और उपवनों में रहने वाले पुलिंद समुदाय के लोग आपके आसपास एकत्रित होते हैं। उनके मधुर गान और गूँजती हुई ध्वनियाँ पर्वतीय उपवनों को आनंद और उल्लास से भर देती हैं।
हे माँ! आपकी सेवा में रहने वाले गणों और शबरी समुदाय के लोगों की उपस्थिति से आपके दिव्य धाम में सुंदर क्रीड़ाएँ और आनंदमय गतिविधियाँ होती हैं। आपका सान्निध्य सबको प्रेम, सद्गुण और प्रसन्नता से भर देता है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपकी कमर पर सुशोभित पीले रंग के सुंदर और विविध रंगों से सजे वस्त्रों की आभा अत्यंत मनमोहक है। आपके दिव्य स्वरूप से निकलने वाला तेज चंद्रमा की चमक को भी फीका कर देता है।
हे देवी! जब देवता और असुर आपके चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करते हैं, तब उनके मुकुटों में जड़े रत्नों की चमक आपके पैरों के नाखूनों पर प्रतिबिंबित होकर उन्हें चंद्रमा के समान उज्ज्वल बना देती है। आपके चरणों की दिव्य आभा अत्यंत मनोहारी है।
हे माँ! आपके वक्षस्थल की गरिमा और सुंदरता की तुलना उन विशाल, शक्तिशाली हाथियों के गंडस्थलों से की गई है, जो स्वर्ण पर्वतों के समान भव्य और प्रभावशाली प्रतीत होते हैं। इस काव्यात्मक वर्णन के माध्यम से स्तोत्रकार आपके दिव्य सौंदर्य और अद्वितीय तेज की प्रशंसा करते हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! आपकी महिमा इतनी महान है कि आप सहस्र किरणों वाले सूर्य के समान तेजस्वी हैं और देवताओं द्वारा निरंतर वंदित होती हैं। आपका दिव्य तेज समस्त संसार को प्रकाशित करता है। आप अपनी अद्भुत शक्ति से शत्रुओं को परास्त करने वाली हैं।
हे देवी! आपने देवताओं के सेनापति और तारकासुर का वध करने वाले भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में देवताओं की रक्षा करने वाली दिव्य शक्ति को प्रकट किया है। आप देवताओं के संकट दूर करने और धर्म की स्थापना करने वाली हैं।
हे माँ! आप राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य जैसे भक्तों की श्रद्धा और भक्ति से भी जुड़ी हुई हैं। देवी महात्म्य की कथा में राजा सुरथ और समाधि ने देवी की आराधना करके उनकी कृपा प्राप्त की थी। आप सच्चे भक्तों की साधना, ध्यान और समर्पण से प्रसन्न होने वाली हैं।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे कल्याणकारी माँ दुर्गा! आप करुणा की साक्षात् मूर्ति हैं। जो भक्त प्रतिदिन श्रद्धा और प्रेम से आपके कमल के समान सुंदर चरणों की सेवा और पूजा करता है, उस पर आपकी कृपा अवश्य होती है।
हे कमल के समान सुंदर देवी! हे कमल में निवास करने वाली माँ! जो आपकी भक्ति में लीन रहता है, वह स्वयं भी लक्ष्मी के समान सौभाग्य, समृद्धि और दिव्य गुणों से संपन्न क्यों नहीं होगा? अर्थात् आपकी कृपा से भक्त के जीवन में शुभता और कल्याण का आगमन होता है।
हे कल्याणमयी माँ! जो साधक यह मानकर आपके चरणों का निरंतर ध्यान करता है कि आपके चरण ही परम लक्ष्य और परम धाम हैं, उसके लिए संसार में क्या अप्राप्य रह सकता है? आपकी शरण में रहने वाले भक्त को आध्यात्मिक शांति और परम कल्याण प्राप्त होता है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ दुर्गा! जो भक्त स्वर्ण कलशों में भरे पवित्र जल से आपके गुणों और महिमा से सुशोभित पूजा-स्थल का अभिषेक करता है तथा श्रद्धापूर्वक आपकी आराधना करता है, वह आपकी कृपा से दिव्य सुख और सौभाग्य प्राप्त करता है।
ऐसा भक्त देवताओं के राजा इंद्र की पत्नी शची (इंद्राणी) के समान दिव्य वैभव और सम्मान प्राप्त करने योग्य बनता है। यह पंक्ति देवी की उपासना से मिलने वाले उच्च आध्यात्मिक और शुभ फल का काव्यात्मक वर्णन करती है।
हे माँ! मैं आपके चरणों को अपनी शरण बनाता हूँ। आप देवताओं द्वारा वंदित हैं और कल्याण प्रदान करने वाली हैं। आपकी शरण में आने से भक्त को आध्यात्मिक शांति, सुरक्षा और कल्याण का मार्ग मिलता है।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
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तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥
हे माँ दुर्गा! आपका निर्मल और चंद्रमा के समान सुंदर मुख अपने तेज से संपूर्ण संसार को शीतलता और आनंद प्रदान करता है। आपकी दिव्य आभा इतनी मनमोहक है कि उसे देखकर भक्तों के मन में श्रद्धा और प्रेम जाग उठता है।
हे देवी! स्वर्ग के राजा इंद्र की नगरी की सुंदर देवांगनाएँ भी आपके अद्वितीय सौंदर्य और दिव्य तेज के सामने फीकी पड़ जाती हैं। आपकी सुंदरता और महिमा अनुपम है, जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
हे माँ! मेरा विश्वास है कि भगवान शिव के पवित्र नाम को अपना धन मानने वाले भक्त पर जब आपकी कृपा होती है, तब उसके जीवन में कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के अनेक मार्ग खुल जाते हैं। आपकी कृपा से भक्त को वह शुभ फल प्राप्त हो सकता है, जिसकी वह सच्चे मन से कामना करता है।
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥
सरल हिंदी अर्थ
हे माँ उमा! मैं दीन और असहाय भक्त आपसे करुणा की प्रार्थना करता हूँ। आप दया की सागर हैं, इसलिए मुझ पर अपनी कृपा अवश्य बरसाइए। मुझे विश्वास है कि आपकी करुणा ही मेरे दुखों को दूर करने और मुझे सही मार्ग दिखाने का सहारा है।
हे संपूर्ण जगत की जननी! आपकी महिमा और करुणा का अनुमान आपके दिव्य स्वरूप तथा भक्तों पर होने वाली आपकी कृपा से लगाया जा सकता है। आप अपने भक्तों की पुकार सुनने वाली और उनका कल्याण करने वाली माँ हैं।
हे देवी! मेरे लिए जो उचित हो, वही कृपापूर्वक स्वीकार कीजिए और मेरे जीवन के गहरे दुखों तथा कष्टों को दूर कर दीजिए। मुझे ऐसी बुद्धि, शक्ति और शांति प्रदान कीजिए कि मैं कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकूँ और धर्म के मार्ग पर चलता रहूँ।
हे महिषासुर का वध करने वाली माँ दुर्गा! हे भगवान शिव की प्रिय देवी, हे पर्वतराज हिमालय की पुत्री! आपकी जय हो, जय हो!
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् PDF डाउनलोड करें
यहाँ से आप महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram – Aigiri Nandini) का संपूर्ण संस्कृत पाठ PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं। इस PDF में सभी 21 श्लोक शामिल हैं। आप इसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर में सेव करके प्रतिदिन माँ दुर्गा की स्तुति और पाठ के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
PDF Details: संस्कृत मूल पाठ | 21 श्लोक | हिंदी अर्थ के बिना | मोबाइल और प्रिंट के लिए उपयोगी।
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