
भगवान शिव को सनातन परंपरा में महादेव, भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ, त्रिलोचन और पशुपतिनाथ जैसे अनेक नामों से पुकारा जाता है। शिव के हर नाम में उनके किसी न किसी स्वरूप, गुण, शक्ति या लीला का वर्णन मिलता है।
मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से भगवान शिव के नामों का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति का ध्यान भगवान की ओर केंद्रित होता है। विशेष रूप से सोमवार, प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव नाम-जाप का विशेष महत्व माना जाता है।
भगवान शिव के 1000 नाम
1000 names of lord shiva for baby boy – हम यहाँ भगवान शिव के 1000 नाम देने जा रहे हैं | अगर आप किसी बालक या अपने पुत्र का नाम भगवन शिव के नाम पर रखना चाहते हैं तो इन नामों में से कोई भी नाम आप रख सकते हैं | Lord Shiva के 1000 नाम यहाँ हमने अर्थ सहित दिए हैं
1 से 100 Names of Lord Shiva for Baby Boy
- शिव — कल्याण स्वरूप
- महेश्वर — महान ईश्वर
- शम्भु — आनंद देने वाले
- पिनाकी — पिनाक धनुष धारण करने वाले
- शशिशेखर — मस्तक पर चंद्रमा धारण करने वाले
- वामदेव — सुंदर एवं शांत स्वरूप
- विरूपाक्ष — असाधारण नेत्रों वाले
- कपर्दी — जटाधारी
- नीललोहित — नील एवं लाल आभा वाले
- शंकर — कल्याण करने वाले
- शूलपाणि — हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले
- खट्वांगी — खट्वांग धारण करने वाले
- विष्णुवल्लभ — भगवान विष्णु को प्रिय
- शिपिविष्ट — सर्वव्यापी स्वरूप
- अम्बिकानाथ — माता अंबिका के स्वामी
- श्रीकण्ठ — सुंदर कंठ वाले
- भक्तवत्सल — भक्तों से प्रेम करने वाले
- भव — संसार के मूल
- शर्व — संहार करने वाले
- त्रिलोकेश — तीनों लोकों के स्वामी
- शितिकण्ठ — श्वेत कंठ वाले
- शिवप्रिय — शिवा अर्थात पार्वती को प्रिय
- उग्र — प्रचंड स्वरूप
- कपाली — कपाल धारण करने वाले
- कामारी — कामदेव के शत्रु
- अंधकासुरसूदन — अंधकासुर का वध करने वाले
- गंगाधर — गंगा को धारण करने वाले
- ललाटाक्ष — ललाट पर नेत्र वाले
- कालकाल — काल के भी काल
- कृपानिधि — कृपा के भंडार
- भीम — अत्यंत शक्तिशाली
- परशुहस्त — हाथ में परशु धारण करने वाले
- मृगपाणि — हाथ में मृग धारण करने वाले
- जटाधर — जटाएं धारण करने वाले
- कैलासवासी — कैलाश पर निवास करने वाले
- कवची — कवच धारण करने वाले
- कठोर — दृढ़ स्वरूप
- त्रिपुरांतक — त्रिपुर का अंत करने वाले
- वृषांक — वृषभ चिह्न वाले
- वृषभारूढ़ — वृषभ पर सवार
- भस्मोद्धूलितविग्रह — भस्म से विभूषित शरीर वाले
- सामप्रिय — सामवेद को प्रिय मानने वाले
- स्वरमय — स्वर स्वरूप
- त्रयीमूर्ति — तीनों देवों के स्वरूप
- अनीश्वर — जिनका कोई स्वामी नहीं
- सर्वज्ञ — सब कुछ जानने वाले
- परमात्मा — परम आत्मा
- सोमसूर्याग्निलोचन — सूर्य, चंद्र और अग्नि को नेत्र रूप में धारण करने वाले
- हवि — यज्ञ में अर्पित आहुति स्वरूप
- यज्ञमय — यज्ञ स्वरूप
- सोम — चंद्रमा स्वरूप
- पंचवक्त्र — पांच मुख वाले
- सदाशिव — सदैव शिव स्वरूप
- विश्वेश्वर — विश्व के ईश्वर
- विश्वनाथ — संसार के नाथ
- लोकनाथ — समस्त लोकों के स्वामी
- महादेव — महान देव
- देवदेव — देवताओं के देव
- त्र्यम्बक — तीन नेत्रों वाले
- त्रिपुरघ्न — त्रिपुर का नाश करने वाले
- त्रिकाग्निकाल — तीन अग्नियों के स्वरूप
- कालाग्निरुद्र — कालाग्नि के समान रुद्र
- नीलकण्ठ — विष के कारण नीले कंठ वाले
- मृत्युञ्जय — मृत्यु पर विजय पाने वाले
- मृत्युंजयेश्वर — मृत्यु को जीतने वाले ईश्वर
- उमापति — उमा के पति
- उमाकान्त — उमा के प्रिय
- गौरीश — गौरी के स्वामी
- पार्वतीपति — पार्वती के पति
- गिरिजापति — गिरिजा के पति
- गिरिश — पर्वतों के स्वामी
- गिरिश्वर — पर्वतों के ईश्वर
- हिमालयप्रिय — हिमालय को प्रिय
- कैलासपति — कैलाश के स्वामी
- भूतनाथ — भूतगणों के नाथ
- भूतपति — समस्त प्राणियों के स्वामी
- भूतभावन — जीवों का पालन करने वाले
- पशुपति — समस्त जीवों के स्वामी
- पशुपालक — प्राणियों के रक्षक
- विश्वरूप — संपूर्ण विश्व के स्वरूप
- विश्वात्मा — विश्व की आत्मा
- विश्वमूर्ति — विश्व स्वरूप
- विश्वम्भर — जगत को धारण करने वाले
- जगदीश — जगत के ईश्वर
- जगन्नाथ — जगत के नाथ
- जगद्गुरु — संसार के गुरु
- जगत्पति — जगत के स्वामी
- लोकपाल — लोकों के रक्षक
- लोककर्ता — लोकों की रचना करने वाले
- लोकबन्धु — संसार के बंधु
- लोकाध्यक्ष — लोकों के अध्यक्ष
- लोकसाक्षी — संसार के साक्षी
- विश्वसाक्षी — विश्व के साक्षी
- परमेश्वर — परम ईश्वर
- परमेशान — परम स्वामी
- परब्रह्म — सर्वोच्च ब्रह्म
- ब्रह्मरूप — ब्रह्म स्वरूप
- ब्रह्मचारी — ब्रह्मचर्य स्वरूप
- योगेश्वर — योग के ईश्वर
- योगीश्वर — योगियों के स्वामी
- श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्: संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और पाठ करने की विधि
- सोमवार को करें शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ, दूर होंगी बाधाएं और मिलेगी महादेव की विशेष कृपा
- महादेव की अद्भुत स्तुति: शिव भक्तों को जरूर पढ़ना चाहिए यह पवित्र स्तोत्र
- नमामि शमीशान निर्वाण रूपम: संपूर्ण स्तोत्र, हिंदी अर्थ, Lyrics और PDF
- शिव तांडव स्तोत्र: अर्थ, लाभ और रावण द्वारा रचित इस दिव्य गान की महिमा
- वेदसार शिव स्तवः शुद्ध पाठ, सरल हिंदी भावार्थ और शिव तत्व का आध्यात्मिक अर्थ
101 से 200 Lord shiva names for baby boy
- महायोगी — महान योगी
- योगाधीश — योग के अधिपति
- योगमूर्ति — योग स्वरूप
- ध्यानगम्य — ध्यान से प्राप्त होने वाले
- ध्यानमूर्ति — ध्यान स्वरूप
- तपस्वी — तप करने वाले
- तपोधन — तप की संपदा वाले
- तपोमय — तप स्वरूप
- तपोनिधि — तप के भंडार
- महातपस्वी — महान तपस्वी
- रुद्र — प्रचंड स्वरूप
- महारुद्र — महान रुद्र
- रौद्र — उग्र स्वरूप
- उग्ररूप — उग्र रूप वाले
- उग्रतेजस — प्रचंड तेज वाले
- उग्रदंष्ट्र — भयंकर दांत वाले
- भैरव — भय का नाश करने वाले
- कालभैरव — काल के भैरव
- भूतभैरव — भूतगणों के भैरव
- वीरभद्र — वीर एवं कल्याणकारी
- महाकाल — महान काल
- कालरुद्र — काल स्वरूप रुद्र
- कालान्तक — काल का अंत करने वाले
- कालदण्डधर — कालदंड धारण करने वाले
- कालस्वरूप — काल के स्वरूप
- कालज्ञ — काल को जानने वाले
- कालाध्यक्ष — काल के अधिपति
- कालकर्ता — काल का विधान करने वाले
- कालहर्ता — काल का नाश करने वाले
- अनादि — जिनका आदि नहीं
- अनन्त — जिनका अंत नहीं
- अव्यय — जिनका क्षय नहीं
- अक्षर — अविनाशी
- अविनाशी — कभी नष्ट न होने वाले
- सनातन — सदा से विद्यमान
- शाश्वत — सदा रहने वाले
- नित्य — सदैव रहने वाले
- ध्रुव — अचल एवं स्थिर
- अचल — जो कभी विचलित न हों
- स्थाणु — अचल स्वरूप
- स्थिर — स्थिर रहने वाले
- अजर — वृद्धावस्था से रहित
- अमर — मृत्यु से परे
- अमृत — अमरत्व स्वरूप
- अमृतेश्वर — अमृत के स्वामी
- अव्यक्त — इंद्रियों से परे
- व्यक्ताव्यक्त — व्यक्त और अव्यक्त दोनों
- निराकार — आकार से रहित
- साकार — साकार स्वरूप
- निर्गुण — गुणों से परे
- सगुण — गुणों सहित
- निरंजन — निर्मल एवं निष्कलंक
- निष्कलंक — दोषरहित
- निर्मल — पूर्ण पवित्र
- शुद्ध — पवित्र स्वरूप
- परमशुद्ध — परम पवित्र
- शांत — शांत स्वरूप
- शांतमूर्ति — शांति की मूर्ति
- शांतिदाता — शांति देने वाले
- शान्तात्मा — शांत आत्मा
- करुणाकर — करुणा करने वाले
- करुणामय — करुणा से पूर्ण
- दयाकर — दया करने वाले
- दयासागर — दया के सागर
- कृपालु — कृपा करने वाले
- कृपाकर — कृपा देने वाले
- कृपानिधि — कृपा के भंडार
- दीनबन्धु — दीनों के बंधु
- दीननाथ — दीनों के नाथ
- आशुतोष — शीघ्र प्रसन्न होने वाले
- भोलेनाथ — सरल हृदय वाले नाथ
- भोलेश्वर — सरल एवं करुणामय ईश्वर
- भक्तप्रिय — भक्तों को प्रिय
- भक्तवत्सल — भक्तों से प्रेम करने वाले
- भक्ताधीन — भक्ति से प्रसन्न होने वाले
- भक्तपाल — भक्तों के रक्षक
- भक्तरक्षक — भक्तों की रक्षा करने वाले
- भक्तसखा — भक्तों के मित्र
- भक्तिगम्य — भक्ति से प्राप्त होने वाले
- भक्तिप्रिय — भक्ति को प्रिय मानने वाले
- वरद — वर देने वाले
- वरदाता — वर प्रदान करने वाले
- वरप्रद — वर प्रदान करने वाले
- अभयप्रद — भय से मुक्ति देने वाले
- अभयदाता — निर्भयता देने वाले
- मोक्षदाता — मोक्ष देने वाले
- मुक्तिदाता — मुक्ति देने वाले
- मुक्तेश्वर — मुक्ति के स्वामी
- मोक्षेश्वर — मोक्ष के ईश्वर
- कैवल्यनाथ — कैवल्य के स्वामी
- ज्ञानेश्वर — ज्ञान के स्वामी
- ज्ञानमूर्ति — ज्ञान स्वरूप
- ज्ञानगम्य — ज्ञान से प्राप्त होने वाले
- ज्ञानदाता — ज्ञान देने वाले
- ज्ञानस्वरूप — ज्ञान के स्वरूप
- प्रज्ञान — परम ज्ञान स्वरूप
- चैतन्य — चेतना स्वरूप
- चिदात्मा — चेतन आत्मा
- चिदानन्द — चेतना एवं आनंद स्वरूप
- परमानन्द — परम आनंद स्वरूप
201 से 300 Modern names of Lord Shiva
- आनंदमूर्ति — आनंद की मूर्ति
- आनंददाता — आनंद देने वाले
- आनंदस्वरूप — आनंद के स्वरूप
- सुखदाता — सुख देने वाले
- सुखस्वरूप — सुख के स्वरूप
- मंगल — शुभ स्वरूप
- मंगलमूर्ति — मंगल की मूर्ति
- मंगलकर्ता — मंगल करने वाले
- कल्याणकारी — कल्याण करने वाले
- कल्याणमूर्ति — कल्याण स्वरूप
- शुभंकर — शुभ करने वाले
- शुभद — शुभ फल देने वाले
- शुभप्रद — मंगल प्रदान करने वाले
- पुण्यात्मा — पुण्य स्वरूप
- पुण्यदाता — पुण्य देने वाले
- पवित्र — परम पवित्र
- पावन — पवित्र करने वाले
- पावनात्मा — पवित्र आत्मा
- हर — दुख एवं पाप हरने वाले
- हरिहर — हरि और हर का स्वरूप
- हरनाथ — हर के नाथ
- हरप्रसाद — कृपा का स्वरूप
- हरिप्रिय — भगवान विष्णु को प्रिय
- हरिभक्तप्रिय — विष्णु भक्तों को प्रिय
- विष्णुमूर्तिधर — विष्णु स्वरूप धारण करने वाले
- विष्णुस्वरूप — विष्णु स्वरूप
- ब्रह्मस्वरूप — ब्रह्मा स्वरूप
- ब्रह्मप्रिय — ब्रह्मा को प्रिय
- ब्रह्माध्यक्ष — ब्रह्म के अधिपति
- देवेश — देवताओं के स्वामी
- देवाधिदेव — देवताओं के देव
- सुरेश्वर — देवताओं के ईश्वर
- सुरनाथ — देवताओं के नाथ
- सुरपति — देवों के स्वामी
- देवराज — देवों के राजा
- देवात्मा — देवस्वरूप आत्मा
- देवप्रिय — देवताओं को प्रिय
- देववन्दित — देवताओं द्वारा पूजित
- देवपूजित — देवों द्वारा पूजित
- ऋषिपूजित — ऋषियों द्वारा पूजित
- मुनिवन्दित — मुनियों द्वारा वंदित
- सिद्धपूजित — सिद्धों द्वारा पूजित
- योगिपूजित — योगियों द्वारा पूजित
- गणाध्यक्ष — गणों के अध्यक्ष
- गणपति — गणों के स्वामी
- गणनाथ — गणों के नाथ
- गणेश्वर — गणों के ईश्वर
- गणाधिप — गणों के अधिपति
- गणप्रिय — गणों को प्रिय
- गणपाल — गणों के रक्षक
- गणवन्दित — गणों द्वारा वंदित
- गणसेवित — गणों द्वारा सेवित
- प्रमथाधिप — प्रमथगणों के स्वामी
- प्रमथेश — प्रमथों के ईश्वर
- भूताध्यक्ष — भूतों के अधिपति
- प्रेतनाथ — प्रेतगणों के नाथ
- पिशाचेश — पिशाचों के स्वामी
- यक्षेश — यक्षों के स्वामी
- गुह्येश — गुप्त शक्तियों के स्वामी
- सिद्धेश — सिद्धों के ईश्वर
- सिद्धनाथ — सिद्धों के नाथ
- सिद्धिदाता — सिद्धि देने वाले
- सिद्धिप्रद — सिद्धि प्रदान करने वाले
- ऋद्धिदाता — ऋद्धि देने वाले
- बुद्धिदाता — बुद्धि देने वाले
- मेधादाता — मेधा देने वाले
- विद्यादाता — विद्या देने वाले
- विद्यानाथ — विद्या के स्वामी
- विद्येश्वर — विद्या के ईश्वर
- सर्वविद्याधिप — सभी विद्याओं के अधिपति
- वेदस्वरूप — वेद स्वरूप
- वेदवेद्य — वेदों द्वारा ज्ञात होने वाले
- वेदकर्ता — वेदों के ज्ञाता/कर्ता
- वेदात्मा — वेदस्वरूप आत्मा
- वेदसार — वेदों का सार
- वेदांतकर्ता — वेदांत स्वरूप
- वेदांतवेद्य — वेदांत से जानने योग्य
- प्रणव — ॐ स्वरूप
- ओंकार — ॐ के स्वरूप
- प्रणवात्मा — प्रणव स्वरूप आत्मा
- मंत्रमूर्ति — मंत्र स्वरूप
- मंत्रेश्वर — मंत्रों के ईश्वर
- मंत्रदाता — मंत्र देने वाले
- मंत्रगम्य — मंत्र से प्राप्त होने वाले
- जपप्रिय — जप को प्रिय मानने वाले
- जपेश्वर — जप के स्वामी
- तपेश्वर — तप के ईश्वर
- यज्ञेश्वर — यज्ञ के ईश्वर
- यज्ञपति — यज्ञ के स्वामी
- यज्ञमूर्ति — यज्ञ स्वरूप
- यज्ञभोक्ता — यज्ञ के भोक्ता
- यज्ञकर्ता — यज्ञ स्वरूप कर्ता
- यज्ञपाल — यज्ञ की रक्षा करने वाले
- यज्ञसाक्षी — यज्ञ के साक्षी
- हविर्भुज — हवि ग्रहण करने वाले
- हुताशनप्रिय — अग्नि को प्रिय मानने वाले
- अग्निरूप — अग्नि स्वरूप
- अग्निनेत्र — अग्नि स्वरूप नेत्र वाले
- अग्निमूर्ति — अग्नि स्वरूप
- अग्निधर — अग्नि धारण करने वाले
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301 से 400 Different names of lord shiva
- सूर्य — प्रकाश स्वरूप
- सूर्यरूप — सूर्य स्वरूप
- सूर्यनेत्र — सूर्य को नेत्र रूप में धारण करने वाले
- भास्करप्रिय — सूर्य को प्रिय
- सोमरूप — चंद्र स्वरूप
- सोमप्रिय — चंद्रमा को प्रिय
- चन्द्रशेखर — चंद्रमा को मस्तक पर धारण करने वाले
- चन्द्रमौली — चंद्रमा को मुकुट रूप में धारण करने वाले
- शशांकशेखर — शशांक को धारण करने वाले
- तारक — संसार-सागर से पार कराने वाले
- तारकनाथ — तारक स्वरूप नाथ
- नक्षत्रेश — नक्षत्रों के स्वामी
- ग्रहेश्वर — ग्रहों के ईश्वर
- ज्योतिरूप — प्रकाश स्वरूप
- ज्योतिर्मय — प्रकाश से पूर्ण
- ज्योतिर्लिंग — ज्योतिर्लिंग स्वरूप
- ज्योतिषांपति — ज्योतियों के स्वामी
- तेजोरूप — तेज स्वरूप
- तेजोमय — तेज से पूर्ण
- महातेजा — महान तेज वाले
- दिव्यतेजस — दिव्य तेज वाले
- प्रभाकर — प्रकाश उत्पन्न करने वाले
- प्रभामय — प्रकाशमय
- दीप्त — प्रकाशमान
- दीप्तरूप — तेजस्वी स्वरूप
- दीप्तिमान — प्रकाश से युक्त
- प्रकाशात्मा — प्रकाश स्वरूप आत्मा
- तमोनाशक — अंधकार का नाश करने वाले
- अज्ञाननाशक — अज्ञान दूर करने वाले
- मोहहर्ता — मोह का नाश करने वाले
- पापनाशक — पापों का नाश करने वाले
- पापहारी — पाप हरने वाले
- दोषहारी — दोष दूर करने वाले
- दुःखहर्ता — दुख हरने वाले
- संतापहर्ता — संताप दूर करने वाले
- भयहर — भय दूर करने वाले
- रोगहारी — रोगों को दूर करने वाले
- शोकहारी — शोक हरने वाले
- बन्धमोचक — बंधन से मुक्त करने वाले
- संसारतारक — संसार से पार कराने वाले
- भवतारक — भवसागर से तारने वाले
- भवमोचक — संसार बंधन से मुक्त करने वाले
- संसारमोचक — संसार से मुक्ति देने वाले
- दुःखमोचक — दुख से मुक्त करने वाले
- पाशमोचक — पाश से मुक्त करने वाले
- कर्ममोचक — कर्मबंधन से मुक्त करने वाले
- जन्ममोचक — जन्मबंधन से मुक्त करने वाले
- मृत्युमोचक — मृत्यु भय से मुक्त करने वाले
- अमृतद — अमृत देने वाले
- अमृतनाथ — अमृत के नाथ
- अमृतस्वरूप — अमृत स्वरूप
- जीवनदाता — जीवन देने वाले
- प्राणदाता — प्राण देने वाले
- प्राणेश्वर — प्राणों के ईश्वर
- प्राणनाथ — प्राणों के नाथ
- प्राणस्वरूप — प्राण स्वरूप
- जीवेश्वर — जीवों के ईश्वर
- जीवात्मा — सभी जीवों की आत्मा
- जीवबन्धु — जीवों के बंधु
- जीवपाल — जीवों के पालक
- प्रजापति — प्रजा के स्वामी
- प्रजाध्यक्ष — प्रजा के अध्यक्ष
- प्रजाभर्ता — प्रजा का पालन करने वाले
- प्रजाकर — प्रजा उत्पन्न करने वाले
- सृष्टिकर्ता — सृष्टि के रचयिता
- सृष्टिधर — सृष्टि को धारण करने वाले
- सृष्टिस्थितिकर्ता — सृष्टि की स्थिति करने वाले
- संहारकर्ता — संहार करने वाले
- संहारमूर्ति — संहार स्वरूप
- लयकर्ता — लय करने वाले
- लयस्वरूप — लय स्वरूप
- उत्पत्तिकर्ता — उत्पत्ति के कर्ता
- स्थितिकर्ता — स्थिति के कर्ता
- पालनकर्ता — पालन करने वाले
- विश्वकर्ता — विश्व के कर्ता
- विश्वपाल — विश्व के पालक
- विश्वसंहर्ता — विश्व का संहार करने वाले
- विश्वधारक — विश्व को धारण करने वाले
- विश्वभर्ता — विश्व का पालन करने वाले
- विश्वाधार — विश्व का आधार
- जगदाधार — जगत का आधार
- भूताधार — समस्त प्राणियों का आधार
- धर्माधार — धर्म का आधार
- सत्याधार — सत्य का आधार
- ज्ञानाधार — ज्ञान का आधार
- योगाधार — योग का आधार
- वेदाधार — वेदों का आधार
- ब्रह्माधार — ब्रह्म का आधार
- आत्माधार — आत्मा का आधार
- चेतनाधार — चेतना का आधार
- कारण — मूल कारण
- महाकारण — महान कारण
- कारणातीत — कारण से परे
- कार्यरूप — कार्य स्वरूप
- कारणेश्वर — कारण के ईश्वर
- मूलाधार — मूल आधार
- परमकारण — सर्वोच्च कारण
- आदिकारण — आदि कारण
- अनादिकारण — अनादि कारण
- कारणेश — कारणों के स्वामी
401 से 500 शिव जी के नाम बच्चों के लिए
- महाकर्ता — महान कर्ता
- महाभर्ता — महान पालक
- महाहर्ता — महान संहारकर्ता
- महायज्ञ — महान यज्ञ स्वरूप
- महातप — महान तप स्वरूप
- महाबल — महान शक्ति वाले
- महावीर — महान वीर
- महाशक्ति — महान शक्ति स्वरूप
- महाज्ञान — महान ज्ञान स्वरूप
- महाबुद्धि — महान बुद्धि वाले
- महायोग — महान योग स्वरूप
- महाध्यान — महान ध्यान स्वरूप
- महाधीर — अत्यंत धैर्यवान
- महाप्रभु — महान प्रभु
- महेश — महान ईश्वर
- महेशान — महान स्वामी
- महेन्द्रप्रिय — इंद्र को प्रिय
- महर्षिपूजित — महर्षियों द्वारा पूजित
- महामुनि — महान मुनि
- महर्षि — महान ऋषि स्वरूप
- ऋषिनाथ — ऋषियों के नाथ
- मुनिनाथ — मुनियों के नाथ
- मुनिप्रिय — मुनियों को प्रिय
- साधुप्रिय — साधुओं को प्रिय
- साधुनाथ — साधुओं के नाथ
- साधुगम्य — साधुओं द्वारा प्राप्त
- संतप्रिय — संतों को प्रिय
- संतपाल — संतों के रक्षक
- धर्मप्रिय — धर्म को प्रिय
- धर्मनाथ — धर्म के नाथ
- धर्मेश्वर — धर्म के ईश्वर
- धर्ममूर्ति — धर्म स्वरूप
- धर्मपाल — धर्म के रक्षक
- धर्मकर्ता — धर्म के कर्ता
- सत्यप्रिय — सत्य को प्रिय
- सत्यनाथ — सत्य के नाथ
- सत्यस्वरूप — सत्य स्वरूप
- सत्यव्रत — सत्य का व्रत धारण करने वाले
- सत्यधर्म — सत्य और धर्म स्वरूप
- ऋतस्वरूप — ऋत स्वरूप
- न्यायप्रिय — न्याय को प्रिय
- न्यायनाथ — न्याय के नाथ
- न्यायमूर्ति — न्याय स्वरूप
- नियन्ता — सबको नियंत्रित करने वाले
- नियामक — व्यवस्था करने वाले
- नियतात्मा — संयमित आत्मा
- संयमी — संयम धारण करने वाले
- जितेन्द्रिय — इंद्रियों को जीतने वाले
- जितक्रोध — क्रोध पर विजय पाने वाले
- जितकाम — काम पर विजय पाने वाले
- जितलोभ — लोभ पर विजय पाने वाले
- जितमोह — मोह पर विजय पाने वाले
- जितमान — अहंकार पर विजय पाने वाले
- जितशत्रु — शत्रुओं पर विजय पाने वाले
- विजयी — सदैव विजय प्राप्त करने वाले
- जय — विजय स्वरूप
- जयन्त — विजयी
- जयदाता — विजय देने वाले
- जयेश्वर — विजय के ईश्वर
- अजेय — जिन्हें जीता न जा सके
- अपराजित — जिन्हें पराजित न किया जा सके
- दुर्जय — जिन्हें जीतना कठिन हो
- दुराधर्ष — जिन्हें रोकना कठिन हो
- दुर्निवार — जिन्हें रोका न जा सके
- वीर्यवान — महान शक्ति वाले
- बलवान — शक्तिशाली
- महाबाहु — शक्तिशाली भुजाओं वाले
- वज्रदेह — वज्र समान शरीर वाले
- वज्रपाणि — वज्र जैसी शक्ति वाले
- धन्वी — धनुष धारण करने वाले
- पिनाकधारी — पिनाक धारण करने वाले
- धनुर्धर — धनुष धारण करने वाले
- शरधारी — बाण धारण करने वाले
- खड्गधारी — तलवार धारण करने वाले
- परशुधर — परशु धारण करने वाले
- त्रिशूलधारी — त्रिशूल धारण करने वाले
- डमरुधर — डमरू धारण करने वाले
- खट्वांगधारी — खट्वांग धारण करने वाले
- कपालधारी — कपाल धारण करने वाले
- नागभूषण — नाग को आभूषण रूप में धारण करने वाले
- नागहार — नाग की माला धारण करने वाले
- नागेन्द्रभूषण — नागराज को भूषण रूप में धारण करने वाले
- नागेंद्र — नागों के स्वामी
- भुजंगभूषण — सर्पों से विभूषित
- सर्पभूषण — सर्प आभूषण वाले
- अहिभूषण — नाग को आभूषण बनाने वाले
- व्याघ्रचर्माम्बर — बाघ की खाल धारण करने वाले
- कृत्तिवास — चर्म धारण करने वाले
- दिगम्बर — दिशाओं को वस्त्र मानने वाले
- नग्न — सांसारिक आडंबर से परे
- भस्मभूषित — भस्म से विभूषित
- भस्मधारी — भस्म धारण करने वाले
- भस्माङ्ग — शरीर पर भस्म लगाने वाले
- भस्मप्रिय — भस्म को प्रिय मानने वाले
- रुद्राक्षमालाधर — रुद्राक्ष माला धारण करने वाले
- रुद्राक्षप्रिय — रुद्राक्ष को प्रिय मानने वाले
- रुद्राक्षभूषण — रुद्राक्ष से विभूषित
- जटामुकुटधारी — जटाओं का मुकुट धारण करने वाले
- जटाजूटधर — जटाजूट धारण करने वाले
- जटाधारी — जटाओं वाले
501 से 600 बच्चों के लिए शिव जी के नाम
- गंगाधर — गंगा को धारण करने वाले
- जाह्नवीधर — जाह्नवी को धारण करने वाले
- भागीरथीप्रिय — भागीरथी को प्रिय
- चंद्रधर — चंद्रमा धारण करने वाले
- चंद्रमौली — चंद्रमा को मुकुट रूप में धारण करने वाले
- सोमशेखर — सोम को शिखर पर धारण करने वाले
- शशिधर — चंद्रमा धारण करने वाले
- शशांकधर — शशांक धारण करने वाले
- ललाटनेत्र — ललाट पर नेत्र वाले
- त्रिनेत्र — तीन नेत्रों वाले
- त्रिलोचन — तीन नेत्रों वाले
- त्र्यक्ष — तीन नेत्रों वाले
- पंचानन — पांच मुख वाले
- पंचवक्त्र — पांच मुख वाले
- सद्योजात — सद्योजात स्वरूप
- वामदेव — वामदेव स्वरूप
- अघोर — अघोर स्वरूप
- तत्पुरुष — तत्पुरुष स्वरूप
- ईशान — ईशान स्वरूप
- ईशानेश्वर — ईशान के ईश्वर
- ईश्वर — परम स्वामी
- ईश — स्वामी
- ईशान — सर्वोच्च स्वामी
- प्रभु — सर्वशक्तिमान प्रभु
- स्वामी — स्वामी स्वरूप
- नाथ — सभी के स्वामी
- अधिपति — अधिपति
- अधीश्वर — सर्वोच्च ईश्वर
- अधीश — स्वामी
- जगत्स्वामी — जगत के स्वामी
- भुवनेश्वर — भुवनों के ईश्वर
- भुवनेश — संसार के स्वामी
- त्रिभुवनेश्वर — तीनों लोकों के ईश्वर
- त्रिभुवननाथ — तीनों लोकों के नाथ
- त्रैलोक्यनाथ — तीनों लोकों के स्वामी
- त्रैलोक्येश्वर — तीनों लोकों के ईश्वर
- त्रैलोक्यपति — तीनों लोकों के पति
- त्रैलोक्यपाल — तीनों लोकों के रक्षक
- त्रैलोक्यमूर्ति — तीनों लोकों का स्वरूप
- त्रैलोक्यसाक्षी — तीनों लोकों के साक्षी
- पृथ्वीपति — पृथ्वी के स्वामी
- भूपति — भूमि के स्वामी
- जलपति — जल के स्वामी
- वायुपति — वायु के स्वामी
- अग्निपति — अग्नि के स्वामी
- आकाशपति — आकाश के स्वामी
- पंचभूतात्मा — पांच तत्वों की आत्मा
- पंचभूतेश्वर — पांच तत्वों के ईश्वर
- भूतात्मा — सभी प्राणियों की आत्मा
- महाभूत — महान तत्व स्वरूप
- तत्त्वेश्वर — तत्वों के ईश्वर
- तत्त्वज्ञ — तत्व को जानने वाले
- तत्त्वमूर्ति — तत्व स्वरूप
- तत्त्वातीत — तत्वों से परे
- प्रकृतिपति — प्रकृति के स्वामी
- प्रकृतिनाथ — प्रकृति के नाथ
- मायापति — माया के स्वामी
- मायाधीश — माया के अधिपति
- महामाया — महान माया स्वरूप
- मायावी — माया के स्वामी
- गुणातीत — तीन गुणों से परे
- त्रिगुणात्मा — तीन गुणों के स्वरूप
- सत्त्वमूर्ति — सत्त्व स्वरूप
- रजोगुणप्रिय — रजोगुण से संबंधित
- तमोगुणहारी — तमोगुण का नाश करने वाले
- गुणेश्वर — गुणों के ईश्वर
- गुणनिधि — गुणों के भंडार
- गुणाकर — गुणों के स्रोत
- गुणातीतात्मा — गुणों से परे आत्मा
- प्रकृत्यतीत — प्रकृति से परे
- पुरुषोत्तम — सर्वोच्च पुरुष
- पुरुषेश्वर — पुरुष के ईश्वर
- पुरुषात्मा — पुरुष स्वरूप आत्मा
- परमपुरुष — सर्वोच्च पुरुष
- महापुरुष — महान पुरुष
- आदिपुरुष — आदि पुरुष
- विश्वपुरुष — विश्व पुरुष
- विराटपुरुष — विराट स्वरूप
- हिरण्यगर्भ — सृष्टि का दिव्य गर्भ
- ब्रह्मगर्भ — ब्रह्म स्वरूप गर्भ
- आत्मरूप — आत्मा स्वरूप
- परमात्मरूप — परमात्मा स्वरूप
- अन्तरात्मा — अंतर की आत्मा
- सर्वात्मा — सबकी आत्मा
- विश्वात्मा — विश्व की आत्मा
- भूतात्मा — समस्त जीवों की आत्मा
- क्षेत्रज्ञ — क्षेत्र के ज्ञाता
- साक्षी — सबके साक्षी
- द्रष्टा — देखने वाले
- दृष्टा — साक्षी स्वरूप
- चिद्घन — चेतना से पूर्ण
- चिदाकाश — चेतना का आकाश
- चिदानन्दघन — चेतना और आनंद से पूर्ण
- परबोध — परम ज्ञान
- आत्मबोध — आत्मज्ञान स्वरूप
- ब्रह्मबोध — ब्रह्मज्ञान स्वरूप
- तुरीय — चौथे परम चेतन स्वरूप
- तुरीयातीत — तुरीय से भी परे
- निर्विकल्प — विकल्प रहित
- निरामय — रोग एवं दोष से रहित
601 से 700 Names of lord shiva for baby boy
- निरुपाधि — उपाधियों से रहित
- निरपेक्ष — किसी अपेक्षा से रहित
- निष्प्रपंच — संसार के प्रपंच से परे
- निष्काम — कामना से रहित
- निरहंकार — अहंकार से रहित
- निरालम्ब — किसी आधार पर निर्भर नहीं
- निरवद्य — दोषरहित
- निर्दोष — दोष से रहित
- निष्पाप — पापरहित
- निष्कल — कलाओं से परे
- निष्क्रिय — कर्म से परे
- निष्प्रभ — सांसारिक प्रभा से परे
- निरंजन — निर्मल
- निराकार — आकाररहित
- निरामिष — आसक्ति से रहित
- निरुपम — जिसकी कोई उपमा नहीं
- अनुपम — अद्वितीय
- अद्वैत — द्वैत से परे
- अद्वितीय — जिसका दूसरा नहीं
- एक — एकमात्र
- एकात्मा — एक आत्मा
- एकरूप — एक स्वरूप
- एकेश्वर — एक परम ईश्वर
- सर्वेश्वर — सबके ईश्वर
- सर्वेश — सबके स्वामी
- सर्वनाथ — सबके नाथ
- सर्वपति — सबके पति
- सर्वकर्ता — सबके कर्ता
- सर्वभर्ता — सबका पालन करने वाले
- सर्वहर्ता — सबका संहार करने वाले
- सर्वदर्शी — सबको देखने वाले
- सर्वज्ञ — सब कुछ जानने वाले
- सर्वशक्तिमान — सभी शक्तियों के स्वामी
- सर्वव्यापी — हर जगह व्याप्त
- सर्वगत — सर्वत्र स्थित
- सर्वमय — सबमें व्याप्त
- सर्वरूप — सभी रूपों में स्थित
- सर्वात्मा — सबकी आत्मा
- सर्वसाक्षी — सबके साक्षी
- सर्वाधार — सबका आधार
- सर्वमंगल — सबका मंगल करने वाले
- सर्वहित — सबका हित करने वाले
- सर्वप्रिय — सबके प्रिय
- सर्वद — सब कुछ देने वाले
- सर्वप्रद — सभी फल देने वाले
- सर्वसिद्धिप्रद — सभी सिद्धियां देने वाले
- सर्वकामप्रद — सभी उचित कामनाएं पूर्ण करने वाले
- सर्वभयहर — सभी भय दूर करने वाले
- सर्वदुःखहर — सभी दुख दूर करने वाले
- सर्वरोगहर — रोगों को दूर करने वाले
- सर्वपापनाशक — सभी पापों का नाश करने वाले
- सर्वबंधनमोचक — सभी बंधनों से मुक्त करने वाले
- सर्वमुक्तिदाता — सभी को मुक्ति देने वाले
- सर्वज्ञानदाता — ज्ञान देने वाले
- सर्वविद्याप्रदाता — सभी विद्याएं देने वाले
- सर्वशरण्य — सभी के आश्रय
- शरणागतवत्सल — शरण में आए भक्तों से प्रेम करने वाले
- शरण्य — शरण देने वाले
- शरणदाता — आश्रय देने वाले
- आश्रय — परम आश्रय
- अनाथनाथ — अनाथों के नाथ
- अबलाबल — निर्बलों के बल
- दीनदयाल — दीनों पर दया करने वाले
- दीनबन्धु — दीनों के बंधु
- करुणासिन्धु — करुणा के सागर
- दयासिन्धु — दया के सागर
- कृपासिन्धु — कृपा के सागर
- प्रेममूर्ति — प्रेम की मूर्ति
- प्रेमस्वरूप — प्रेम स्वरूप
- प्रेमदाता — प्रेम देने वाले
- भक्तहृदयवासी — भक्तों के हृदय में निवास करने वाले
- हृदयेश — हृदय के स्वामी
- हृदयवासी — हृदय में निवास करने वाले
- अन्तर्यामी — भीतर स्थित सबको जानने वाले
- मनोहर — मन को आकर्षित करने वाले
- मनोज्ञ — मन को प्रिय लगने वाले
- मनोनाथ — मन के स्वामी
- मनःप्रभु — मन के प्रभु
- मनोमय — मन स्वरूप
- मानसप्रिय — मन को प्रिय
- भावप्रिय — भाव को प्रिय मानने वाले
- भावगम्य — भाव से प्राप्त होने वाले
- भावात्मा — भाव स्वरूप
- भावेश — भाव के स्वामी
- प्रेमगम्य — प्रेम से प्राप्त होने वाले
- श्रद्धागम्य — श्रद्धा से प्राप्त होने वाले
- श्रद्धाप्रिय — श्रद्धा को प्रिय मानने वाले
- विश्वासदाता — विश्वास देने वाले
- भक्तिगम्येश्वर — भक्ति से प्राप्त होने वाले ईश्वर
- नामप्रिय — नामस्मरण को प्रिय मानने वाले
- नामरूप — नाम और रूप स्वरूप
- नामात्मा — नाम स्वरूप आत्मा
- नामेश्वर — नाम के ईश्वर
- कीर्तिप्रिय — कीर्तन को प्रिय मानने वाले
- स्तुतिप्रिय — स्तुति को प्रिय मानने वाले
- स्तुतिगम्य — स्तुति से प्राप्त होने वाले
- वन्दनीय — वंदना योग्य
- वन्दित — वंदित स्वरूप
- पूज्य — पूजा के योग्य
- पूजित — पूजा किए जाने वाले
701 से 800 Names of shiva for baby boy
- पूजाप्रिय — पूजा को प्रिय मानने वाले
- अर्चित — अर्चना किए जाने वाले
- अर्चनप्रिय — अर्चना को प्रिय मानने वाले
- अभिषेकप्रिय — अभिषेक को प्रिय मानने वाले
- जलप्रिय — जल अर्पण को प्रिय मानने वाले
- बिल्वप्रिय — बेलपत्र को प्रिय मानने वाले
- धतूरप्रिय — धतूरे को प्रिय मानने वाले
- अक्षतप्रिय — अक्षत को प्रिय मानने वाले
- पुष्पप्रिय — पुष्पों को प्रिय मानने वाले
- दीपप्रिय — दीप को प्रिय मानने वाले
- धूपप्रिय — धूप को प्रिय मानने वाले
- नैवेद्यप्रिय — नैवेद्य को प्रिय मानने वाले
- पंचामृतप्रिय — पंचामृत को प्रिय मानने वाले
- गंगाजलप्रिय — गंगाजल को प्रिय मानने वाले
- रुद्राभिषेकप्रिय — रुद्राभिषेक को प्रिय मानने वाले
- महामृत्युंजय — मृत्यु पर विजय देने वाला स्वरूप
- मृत्युंजयेश — मृत्यु के विजेता
- त्र्यंबकेश्वर — तीन नेत्रों वाले ईश्वर
- ओंकारेश्वर — ॐ स्वरूप ईश्वर
- सोमनाथ — सोम के नाथ
- मल्लिकार्जुन — मल्लिका के प्रिय अर्जुन स्वरूप
- महाकालेश्वर — महाकाल के ईश्वर
- केदारनाथ — केदार के नाथ
- भीमाशंकर — भीमाशंकर स्वरूप
- काशीविश्वनाथ — काशी के विश्वनाथ
- त्र्यंबकेश्वरनाथ — त्र्यंबक के नाथ
- वैद्यनाथ — वैद्य स्वरूप नाथ
- नागेश्वर — नागों के ईश्वर
- रामेश्वर — राम द्वारा पूजित ईश्वर
- घृष्णेश्वर — घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वरूप
- ज्योतिर्लिंगेश — ज्योतिर्लिंगों के ईश्वर
- द्वादशज्योतिर्लिंगेश — बारह ज्योतिर्लिंगों के स्वामी
- काशीपति — काशी के स्वामी
- अविमुक्तेश्वर — अविमुक्त क्षेत्र के ईश्वर
- विश्वनाथेश्वर — विश्व के नाथ
- तारकेश्वर — तारक मंत्र के ईश्वर
- मुक्तिनाथ — मुक्ति के नाथ
- पशुपतिनाथ — पशुओं के स्वामी
- पशुपति — जीवों के स्वामी
- कपिलेश्वर — कपिल स्वरूप ईश्वर
- नटराज — नृत्य के राजा
- नटेश्वर — नृत्य के ईश्वर
- नृत्यप्रिय — नृत्य को प्रिय मानने वाले
- तांडवप्रिय — तांडव को प्रिय मानने वाले
- तांडवेश्वर — तांडव के ईश्वर
- नृत्यमूर्ति — नृत्य स्वरूप
- नादब्रह्म — नाद स्वरूप ब्रह्म
- नादमूर्ति — नाद स्वरूप
- नादेश्वर — नाद के ईश्वर
- डमरुनादप्रिय — डमरू के नाद को प्रिय मानने वाले
- संगीतप्रिय — संगीत को प्रिय मानने वाले
- गीतप्रिय — गीत को प्रिय मानने वाले
- स्वरनाथ — स्वरों के नाथ
- स्वरूप — स्वर स्वरूप
- कलानाथ — कलाओं के नाथ
- कलाधर — कलाओं को धारण करने वाले
- चतुष्षष्टिकलानाथ — चौंसठ कलाओं के स्वामी
- कलाप्रिय — कलाओं को प्रिय मानने वाले
- कलाकार — दिव्य कला के स्वरूप
- नादबिन्दु — नाद और बिंदु स्वरूप
- बिन्दुनाथ — बिंदु के स्वामी
- शब्दब्रह्म — शब्द स्वरूप ब्रह्म
- शब्दात्मा — शब्द स्वरूप आत्मा
- अक्षरब्रह्म — अक्षर स्वरूप ब्रह्म
- प्रणवेश्वर — प्रणव के ईश्वर
- महामंत्र — महान मंत्र स्वरूप
- पंचाक्षरमय — पंचाक्षर मंत्र स्वरूप
- नमःशिवायस्वरूप — नमः शिवाय मंत्र स्वरूप
- रुद्रमय — रुद्र स्वरूप
- रुद्राध्यायप्रिय — रुद्राध्याय को प्रिय मानने वाले
- शिवमंत्रप्रिय — शिव मंत्र को प्रिय मानने वाले
- मंत्रस्वरूप — मंत्र स्वरूप
- तंत्रज्ञ — तंत्र के ज्ञाता
- तंत्रेश्वर — तंत्र के ईश्वर
- यंत्रेश्वर — यंत्र के ईश्वर
- साधनप्रिय — साधना को प्रिय मानने वाले
- साधनागम्य — साधना से प्राप्त होने वाले
- साधनानाथ — साधना के नाथ
- सिद्धियोगेश्वर — सिद्ध योग के ईश्वर
- सिद्धयोगी — सिद्ध योगी
- हठयोगेश्वर — हठयोग के ईश्वर
- राजयोगेश्वर — राजयोग के ईश्वर
- ज्ञानयोगेश्वर — ज्ञानयोग के ईश्वर
- भक्तियोगेश्वर — भक्तियोग के ईश्वर
- कर्मयोगेश्वर — कर्मयोग के ईश्वर
- ध्यानयोगेश्वर — ध्यानयोग के ईश्वर
- योगमाया — योगमाया स्वरूप
- योगनिद्रा — योगनिद्रा स्वरूप
- समाधिस्थ — समाधि में स्थित
- समाधिनाथ — समाधि के नाथ
- समाधिगम्य — समाधि से प्राप्त होने वाले
- ध्यानेश्वर — ध्यान के ईश्वर
- ध्यानप्रिय — ध्यान को प्रिय मानने वाले
- ध्यानस्थ — ध्यान में स्थित
- मौनी — मौन धारण करने वाले
- मौनेश्वर — मौन के ईश्वर
- मौनप्रिय — मौन को प्रिय मानने वाले
- एकान्तप्रिय — एकांत को प्रिय मानने वाले
- वनवासी — वन में निवास करने वाले
- अरण्यनाथ — वन के नाथ
801 से 900 names of shiva in hindi
- गिरिवासी — पर्वत पर निवास करने वाले
- पर्वतप्रिय — पर्वतों को प्रिय मानने वाले
- पर्वतेश्वर — पर्वतों के ईश्वर
- कैलासनाथ — कैलाश के नाथ
- कैलासेश्वर — कैलाश के ईश्वर
- हिमगिरिवासी — हिमालय में रहने वाले
- हिमालयनाथ — हिमालय के नाथ
- गिरिराजप्रिय — गिरिराज को प्रिय
- गिरिजाप्रिय — गिरिजा को प्रिय
- उमेश — उमा के स्वामी
- उमानाथ — उमा के नाथ
- उमाकान्त — उमा के प्रिय
- उमाप्रिय — उमा को प्रिय
- गौरीपति — गौरी के पति
- गौरीशंकर — गौरी और शंकर का संयुक्त स्वरूप
- पार्वतीनाथ — पार्वती के नाथ
- पार्वतीप्रिय — पार्वती को प्रिय
- भवानीशंकर — भवानी के शंकर
- जगदम्बापति — जगदंबा के पति
- शक्तिपति — शक्ति के स्वामी
- शक्तिनाथ — शक्ति के नाथ
- शक्तिस्वरूप — शक्ति स्वरूप
- शक्तिधर — शक्ति धारण करने वाले
- अर्धनारीश्वर — अर्धनारीश्वर स्वरूप
- अर्धनारी — आधा शिव और आधा शक्ति स्वरूप
- अर्धेन्दुमौलि — अर्धचंद्र धारण करने वाले
- स्त्रीपुरुषात्मक — स्त्री और पुरुष दोनों स्वरूप
- शिवाशक्तिमय — शिव और शक्ति से पूर्ण
- प्रकृतिपुरुषेश्वर — प्रकृति और पुरुष के ईश्वर
- मातापिता — माता और पिता दोनों स्वरूप
- जगत्पिता — जगत के पिता
- जगन्माता — जगत की मातृशक्ति स्वरूप
- पितामह — आदि पितामह
- मातामह — मातृस्वरूप
- कुमारगुरु — कुमार कार्तिकेय के गुरु
- गणेशजनक — गणेश के पिता
- स्कन्दपिता — स्कन्द के पिता
- कार्तिकेयप्रिय — कार्तिकेय को प्रिय
- गणेशप्रिय — गणेश को प्रिय
- नन्दीश्वरप्रिय — नंदी को प्रिय
- नन्दीवाहनप्रिय — नंदी को प्रिय
- वृषवाहन — वृषभ पर सवार
- वृषभध्वज — वृषभ ध्वज वाले
- वृषकेतु — वृषभ चिह्न वाले
- वृषभेश — वृषभ के स्वामी
- नन्दीश्वरनाथ — नंदी के नाथ
- गणनायक — गणों के नायक
- गणप्रियेश — गणों के प्रिय ईश्वर
- भूतगणनाथ — भूतगणों के नाथ
- प्रमथगणपति — प्रमथगणों के स्वामी
- भूतगणेश्वर — भूतगणों के ईश्वर
- प्रेतगणेश — प्रेतगणों के स्वामी
- योगिनीनाथ — योगिनियों के नाथ
- योगीप्रिय — योगियों को प्रिय
- सिद्धप्रिय — सिद्धों को प्रिय
- ऋषिप्रिय — ऋषियों को प्रिय
- मुनिप्रिय — मुनियों को प्रिय
- देवप्रिय — देवताओं को प्रिय
- दानवप्रिय — दानवों के प्रति भी करुणामय
- असुरारि — असुरों का शत्रु
- दैत्यनाशक — दैत्यों का नाश करने वाले
- त्रिपुरारि — त्रिपुरासुर के शत्रु
- अंधकारि — अंधकासुर का नाश करने वाले
- कामारि — कामदेव के शत्रु
- दक्षयज्ञविनाशक — दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाले
- वीरभद्रप्रिय — वीरभद्र को प्रिय
- जालंधरहारी — जालंधर का नाश करने वाले
- गजासुरमर्दन — गजासुर का वध करने वाले
- गजान्तक — गजासुर का अंत करने वाले
- भस्मासुरविनाशक — भस्मासुर का अंत कराने वाले
- तारकासुरहन्तृ — तारकासुर के विनाशकर्ता
- शत्रुघ्न — शत्रुओं का नाश करने वाले
- दुष्टनाशक — दुष्टों का नाश करने वाले
- अधर्मनाशक — अधर्म का नाश करने वाले
- धर्मसंस्थापक — धर्म की स्थापना करने वाले
- सत्यसंरक्षक — सत्य की रक्षा करने वाले
- भक्तरक्षक — भक्तों की रक्षा करने वाले
- साधुरक्षक — साधुओं की रक्षा करने वाले
- देवसंरक्षक — देवताओं के रक्षक
- लोकसंरक्षक — लोकों के रक्षक
- गौब्राह्मणहितैषी — गौ और ब्राह्मणों के हितैषी
- प्राणिरक्षक — प्राणियों के रक्षक
- जीवदयालु — जीवों पर दया करने वाले
- अहिंसाप्रिय — अहिंसा को प्रिय मानने वाले
- क्षमाशील — क्षमा करने वाले
- क्षमामूर्ति — क्षमा स्वरूप
- क्षमाकर — क्षमा देने वाले
- उदार — अत्यंत उदार
- औदार्यनिधि — उदारता के भंडार
- सरल — सरल स्वरूप
- सरलात्मा — सरल आत्मा
- सहज — सहज स्वरूप
- सहजानन्द — सहज आनंद स्वरूप
- अलोलुप — लोभ से रहित
- अपरिग्रही — संग्रह से रहित
- त्यागी — त्याग करने वाले
- वैराग्यमूर्ति — वैराग्य स्वरूप
- विरक्त — संसार से अनासक्त
- अवधूत — सांसारिक बंधनों से परे
- दिगम्बरनाथ — दिगंबर स्वरूप नाथ
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901 से 1000 Names of Shiva
- औघड़ — सरल एवं अलौकिक स्वरूप
- अवधूतनाथ — अवधूतों के नाथ
- अघोरी — अघोर साधना के स्वामी
- अघोरेश्वर — अघोर के ईश्वर
- अघोरनाथ — अघोर के नाथ
- अघोरमूर्ति — अघोर स्वरूप
- कापालिकप्रिय — कापालिक साधना को प्रिय मानने वाले
- श्मशानवासी — श्मशान में निवास करने वाले
- श्मशाननाथ — श्मशान के नाथ
- भस्मवासी — भस्म से विभूषित रहने वाले
- भूतवासी — भूतगणों के बीच रहने वाले
- प्रेतवासी — प्रेतगणों के बीच रहने वाले
- योगिराज — योगियों के राजा
- योगिनाथ — योगियों के नाथ
- महायोगिराज — महान योगिराज
- सिद्धराज — सिद्धों के राजा
- ऋषिराज — ऋषियों में श्रेष्ठ
- मुनिराज — मुनियों में श्रेष्ठ
- देवाधिदेव — देवताओं के देव
- महादेवेश्वर — महादेव के ईश्वर स्वरूप
- विश्वेश — विश्व के स्वामी
- विश्वनाथेश — विश्व के नाथ
- लोकनाथेश — लोकों के नाथ
- त्रिलोकेश्वर — तीनों लोकों के ईश्वर
- त्रिभुवनेश — तीनों भुवनों के स्वामी
- भुवननाथ — भुवनों के नाथ
- विश्वाधिप — विश्व के अधिपति
- विश्वपति — विश्व के पति
- विश्वेश्वर — विश्व के ईश्वर
- विश्वमंगल — विश्व का मंगल करने वाले
- शिवोत्तम — श्रेष्ठ शिव स्वरूप
- शिवप्रिय — शिव को प्रिय
- शिवद — कल्याण देने वाले
- शिवकर — कल्याण करने वाले
- शिवमय — शिव से पूर्ण
- शिवात्मा — शिव स्वरूप आत्मा
- शिवेश्वर — शिव के ईश्वर
- शिवनाथ — शिव के नाथ
- शिवस्वरूप — शिव स्वरूप
- शिवानन्द — शिव का आनंद स्वरूप
- शिवानन्दमूर्ति — शिव आनंद की मूर्ति
- शिवज्ञान — शिवज्ञान स्वरूप
- शिवबोध — शिवबोध स्वरूप
- शिवतत्त्व — शिव तत्व स्वरूप
- शिवयोगी — शिव योग स्वरूप
- शिवध्यान — शिव ध्यान स्वरूप
- शिवभक्तप्रिय — शिव भक्तों को प्रिय
- शिवभक्तवत्सल — शिव भक्तों से प्रेम करने वाले
- शिवभक्तपाल — शिव भक्तों के रक्षक
- शिवशरण — शिव की शरण देने वाले
- शिवशरणागतवत्सल — शरणागत भक्तों से प्रेम करने वाले
- शिवमंगल — शिवमय मंगल स्वरूप
- शिवकल्याण — शिवमय कल्याण
- शिवमोक्षदाता — शिव रूप में मोक्ष देने वाले
- शिवमुक्तिदाता — मुक्ति प्रदान करने वाले
- शिवसुखदाता — सुख प्रदान करने वाले
- शिवशांतिदाता — शांति देने वाले
- शिवज्ञानदाता — ज्ञान देने वाले
- शिवसिद्धिदाता — सिद्धि देने वाले
- शिववरदाता — वर देने वाले
- शिवअभयदाता — अभय देने वाले
- शिवकरुणामय — करुणा से पूर्ण
- शिवदयालु — दया करने वाले
- शिवकृपालु — कृपा करने वाले
- शिवदीनबन्धु — दीनों के बंधु
- शिवअनाथनाथ — अनाथों के नाथ
- शिवभयहारी — भय हरने वाले
- शिवदुःखहारी — दुख हरने वाले
- शिवपापहारी — पाप हरने वाले
- शिवरोगहारी — रोग हरने वाले
- शिवशोकहारी — शोक हरने वाले
- शिवबंधनमोचक — बंधन से मुक्त करने वाले
- शिवसंसारतारक — संसार सागर से तारने वाले
- शिवभवमोचक — भवबंधन से मुक्त करने वाले
- शिवकैवल्यदाता — कैवल्य देने वाले
- शिवपरब्रह्म — परम ब्रह्म स्वरूप
- शिवपरमात्मा — परमात्मा स्वरूप
- शिवअनन्त — अनंत स्वरूप
- शिवसनातन — सनातन स्वरूप
- शिवशाश्वत — शाश्वत स्वरूप
- शिवअव्यय — अविनाशी स्वरूप
- शिवअक्षर — अक्षर स्वरूप
- शिवअमर — अमर स्वरूप
- शिवअमृत — अमृत स्वरूप
- शिवनित्य — नित्य स्वरूप
- शिवध्रुव — स्थिर स्वरूप
- शिवअचल — अचल स्वरूप
- शिवनिरंजन — निष्कलंक स्वरूप
- शिवनिर्मल — निर्मल स्वरूप
- शिवनिष्कलंक — दोषरहित स्वरूप
- शिवशुद्ध — शुद्ध स्वरूप
- शिवपावन — पवित्र करने वाले
- शिवमुक्त — मुक्त स्वरूप
- शिवनिर्वाण — निर्वाण स्वरूप
- शिवकैवल्य — कैवल्य स्वरूप
- शिवब्रह्म — ब्रह्म स्वरूप
- शिवचैतन्य — चेतना स्वरूप
- शिवानन्दघन — आनंद से पूर्ण
- सदाशिव — सदा कल्याणकारी
- महेश्वर — महान ईश्वर
भगवान शिव के 1000 नामों का जाप कैसे करें?
शिव नामों का स्मरण करने के लिए किसी कठिन नियम की आवश्यकता नहीं मानी जाती। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान शिव का ध्यान करना महत्वपूर्ण है।
सुबह स्नान करके स्वच्छ स्थान पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के सामने बैठ सकते हैं। दीपक जलाकर जल या गंगाजल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव के नामों का स्मरण करें।
यदि पूरे 1000 नामों का पाठ करना संभव न हो तो प्रतिदिन कुछ नाम पढ़कर भी शिव का ध्यान किया जा सकता है। सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि के दिन विशेष रूप से शिव आराधना की जाती है।
शिव के 1000 नामों का महत्व
भगवान शिव के अलग-अलग नाम उनके अलग-अलग स्वरूपों का स्मरण कराते हैं। “नीलकंठ” नाम समुद्र मंथन से जुड़ी उनकी लीला की याद दिलाता है, जबकि “त्रिलोचन” उनके तीन नेत्रों वाले स्वरूप को दर्शाता है।
“पशुपति” उन्हें समस्त जीवों का स्वामी बताता है और “महाकाल” उनके काल से परे स्वरूप की ओर संकेत करता है। इसी तरह “आशुतोष” नाम भगवान शिव के शीघ्र प्रसन्न होने वाले स्वरूप को दर्शाता है।
शिव के नामों का पाठ धार्मिक आस्था के साथ-साथ मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक चिंतन का माध्यम भी बन सकता है।
सोमवार को शिव नाम जाप
सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करके ॐ नमः शिवाय का जाप किया जा सकता है।
यदि आप 1000 नामों का पाठ कर रहे हैं तो जल्दबाजी करने के बजाय प्रत्येक नाम को ध्यानपूर्वक पढ़ना बेहतर है।
महाशिवरात्रि पर 1000 नामों का पाठ
महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का प्रमुख पर्व है। इस अवसर पर भक्त उपवास, रात्रि जागरण, शिवलिंग अभिषेक और मंत्र-जाप करते हैं।
शिव के 1000 नामों का पाठ भी इस दिन श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा की विधि अपनाना उचित है।
FAQ — भगवान शिव के 1000 नाम
भगवान शिव के 1000 नामों को क्या कहते हैं?
भगवान शिव के एक हजार नामों के संग्रह को सामान्यतः शिव सहस्रनाम या शिव सहस्रनामावली कहा जाता है।
क्या रोज भगवान शिव के 1000 नाम पढ़ सकते हैं?
हां, श्रद्धा के साथ शिव के नामों का स्मरण किया जा सकता है। समय कम हो तो अपनी सुविधा के अनुसार कुछ नामों का पाठ भी कर सकते हैं।
भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध नाम कौन सा है?
भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ, शंकर, शिव, नीलकंठ, त्रिलोचन, पशुपतिनाथ और महाकाल जैसे अनेक नामों से जाना जाता है।
क्या सोमवार को शिव के नामों का जाप कर सकते हैं?
हां। सोमवार को भगवान शिव की पूजा और नाम-स्मरण करने की परंपरा प्रचलित है।
शिव के 1000 नाम पढ़ने का क्या महत्व है?
धार्मिक दृष्टि से शिव के नामों का स्मरण भगवान के विभिन्न स्वरूपों और गुणों का ध्यान करने का माध्यम माना जाता है। इससे साधक का ध्यान पूजा और आध्यात्मिक चिंतन की ओर केंद्रित होता है।
निष्कर्ष
भगवान शिव के ये नाम केवल अलग-अलग संबोधन नहीं हैं, बल्कि उनके करुणामय, रौद्र, योगी, गृहस्थ, नटराज, महाकाल और परमात्मा जैसे अनेक स्वरूपों का स्मरण कराते हैं। शिव को किसी एक रूप में सीमित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि सनातन परंपरा में उन्हें “महादेव” कहा गया है।
हर हर महादेव। 🔱 श्री शिवाय नमस्तुभ्यं
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