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शिव स्तुति: “आशुतोष शशाँक शेखर” हिंदी और English

    इस स्तुति में भगवान शिव को “आशुतोष” कहा गया है, जिसका अर्थ है जो शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। “शशाँक शेखर” और “चन्द्र मौली” उनके उस स्वरूप को दर्शाते हैं जिसमें वे अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं। “दिगम्बरा” शब्द उनके त्याग और वैराग्य का प्रतीक है। स्तुति में शिव को निराकार, अविनाशी, ओंकार स्वरूप और संपूर्ण सृष्टि के रचयिता एवं संहारक के रूप में वर्णित किया गया है। वे महायोगी हैं, दयालु हैं, और अपने भक्तों के सभी भय और कष्टों को दूर करने वाले हैं। त्रिशूलधारी, त्रिलोचन और विश्वनाथ जैसे नाम उनके शक्तिशाली और सर्वव्यापी स्वरूप को दर्शाते हैं। भक्त इस स्तुति के माध्यम से भगवान शिव से अपने पापों की क्षमा मांगता है और उनके चरणों में अटूट भक्ति की कामना करता है। “ॐ नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र का जप आत्मिक शांति और मोक्ष का मार्ग माना गया है।

    आशुतोष शशाँक शेखर” हिंदी

    आशुतोष शशाँक शेखर,
    चन्द्र मौली चिदंबरा,
    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
    कोटि नमन दिगम्बरा ॥

    निर्विकार ओमकार अविनाशी,
    तुम्ही देवाधि देव,
    जगत सर्जक प्रलय करता,
    शिवम सत्यम सुंदरा ॥

    निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
    महा योगीश्वरा,
    दयानिधि दानिश्वर जय,
    जटाधार अभयंकरा ॥

    शूलपाणि त्रिशूल धारी,
    औघड़ बाघम्बरी,
    जय महेश त्रिलोचनाय,
    विश्वनाथ विशम्भरा ॥

    नाथ नागेश्वर हरो हर,
    पाप शाप अभिशाप तम,
    महादेव महान भोले,
    सदा शिव शिव शंकरा ॥

    जगतपति अनुरक्ति भक्ति,
    सदैव तेरे चरण हो,
    क्षमा हो अपराध सब,
    जय जयति जगदीश्वरा ॥

    जनम जीवन जगत का,
    संताप ताप मिटे सभी,
    ॐ नमः शिवाय मन,
    जपता रहे पंचाक्षरा ॥

    आशुतोष शशाँक शेखर,
    चन्द्र मौली चिदंबरा,
    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
    कोटि नमन दिगम्बरा ॥

    कोटि नमन दिगम्बरा…
    कोटि नमन दिगम्बरा…
    कोटि नमन दिगम्बरा…

    Ashutosh Shashank Shekhar
    Ashutosh Shashank Shekhar

    Ashutosh Shashank Shekhar Roman (English) Transliteration

    Ashutosh Shashank Shekhar,
    Chandra Mauli Chidambara,
    Koti Koti Pranam Shambhu,
    Koti Naman Digambara ॥

    Nirvikar Omkar Avinashi,
    Tumhi Devadhi Dev,
    Jagat Sarjak Pralay Karta,
    Shivam Satyam Sundara ॥

    Nirankar Swaroop Kaleshwar,
    Maha Yogeeshwar,
    Dayanidhi Danishwar Jay,
    Jatadhar Abhayankara ॥

    Shoolpani Trishul Dhari,
    Aughad Baghambari,
    Jay Mahesh Trilochanay,
    Vishwanath Vishambhara ॥

    Nath Nageshwar Haro Har,
    Paap Shaap Abhishaap Tam,
    Mahadev Mahan Bhole,
    Sada Shiv Shiv Shankara ॥

    Jagatpati Anurakti Bhakti,
    Sadaiv Tere Charan Ho,
    Kshama Ho Aparadh Sab,
    Jay Jayati Jagadishwara ॥

    Janam Jeevan Jagat Ka,
    Santaap Taap Mite Sabhi,
    Om Namah Shivaay Man,
    Japta Rahe Panchakshara ॥

    Ashutosh Shashank Shekhar,
    Chandra Mauli Chidambara,
    Koti Koti Pranaam Shambhoo,
    Koti Naman Digambara ॥

    Koti Naman Digambara…
    Koti Naman Digambara…
    Koti Naman Digambara…

    “आशुतोष शशाँक शेखर” शिव स्तुति का कोई प्रमाणित या प्रसिद्ध रचयिता उपलब्ध नहीं है। इसे सामान्यतः अज्ञात (परंपरागत भक्ति रचना) माना जाता है, जो समय के साथ लोकभक्ति के रूप में प्रचलित हुई है।

    भगवान शिव की आराधना सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे त्रिदेवों में संहारकर्ता होने के साथ-साथ करुणा, सरलता और भक्ति के प्रतीक हैं। “आशुतोष शशाँक शेखर” शिव स्तुति एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भक्ति रचना है, जिसमें भगवान शिव के विभिन्न रूपों, गुणों और उनकी दिव्यता का सुंदर वर्णन किया गया है। यह स्तुति भक्त के मन में श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक शांति का संचार करती है। यह शिव स्तुति भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण की अद्भुत अभिव्यक्ति है। इसका नियमित पाठ मन को शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। यह स्तुति हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति, सरलता और समर्पण से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है।

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