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शिव चालीसा | | Shiv Chalisa in Hindi Lyrics, PDF, Benefits and Meaning

    भगवान शिव Lord Shiv की महिमा अनंत और असीम है। वे सृष्टि के संहारक होते हुए भी करुणा, दया और कल्याण के प्रतीक हैं।शिव चालीसा (Shiv Chalisa) एक अत्यंत पवित्र स्तुति है, जिसे भक्त भावपूर्वक पढ़कर अपने जीवन के दुखों, कष्टों और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। इस चालीसा में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनके अद्भुत कार्यों और भक्तों के प्रति उनकी असीम कृपा का वर्णन किया गया है। नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से मन को शांति, जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

    भगवान शिव Lord Shiv हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। उन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर और नीलकंठ जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन के दुख, भय, रोग और संकट दूर हो जाते हैं। विशेष रूप से सावन सोमवार, महाशिवरात्रि और प्रदोष व्रत में Shiv Chalisa in Hindi Lyrics का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

    यदि आप शिव चालीसा हिंदी में, उसका अर्थ, लाभ और पाठ विधि जानना चाहते हैं, तो यहां आपको संपूर्ण जानकारी मिलेगी।

    शिव चालीसा | Shiv Chalisa in Hindi

    दोहा ॥

    श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।

    कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

    ॥ चौपाई ॥

    जय गिरिजा पति दीन दयाला ।

    सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

    भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।

    कानन कुण्डल नागफनी के ॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये ।

    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।

    छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

    मैना मातु की हवे दुलारी ।

    बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।

    करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।

    सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ ।

    या छवि को कहि जात न काऊ ॥

    देवन जबहीं जाय पुकारा ।

    तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

    किया उपद्रव तारक भारी ।

    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

    तुरत षडानन आप पठायउ ।

    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

    आप जलंधर असुर संहारा ।

    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।

    सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी ।

    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

    दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।

    सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

    वेद नाम महिमा तव गाई।

    अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

    प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।

    जरत सुरासुर भए विहाला ॥

    कीन्ही दया तहं करी सहाई ।

    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

    पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।

    जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

    सहस कमल में हो रहे धारी ।

    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।

    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।

    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

    जय जय जय अनन्त अविनाशी ।

    करत कृपा सब के घटवासी ॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।

    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।

    येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।

    संकट से मोहि आन उबारो ॥

    मात-पिता भ्राता सब होई ।

    संकट में पूछत नहिं कोई ॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी ।

    आय हरहु मम संकट भारी ॥

    धन निर्धन को देत सदा हीं ।

    जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

    अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।

    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

    शंकर हो संकट के नाशन ।

    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।

    शारद नारद शीश नवावैं ॥

    नमो नमो जय नमः शिवाय ।

    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

    जो यह पाठ करे मन लाई ।

    ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

    ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।

    पाठ करे सो पावन हारी ॥

    पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।

    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

    पण्डित त्रयोदशी को लावे ।

    ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

    त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।

    ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।

    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे ।

    अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

    कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।

    जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

    ॥ दोहा ॥

    नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।

    तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

    मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।

    अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

    Shiv Chalisa English Lyrics

    Doha

    Shri Ganesh Girija Suvan, Mangal Mool Sujaan
    Kahat Ayodhyadas Tum, Dehu Abhay Vardaan

    Chaupai

    Jai Girija Pati Deen Dayala
    Sada Karat Santan Pratipala

    Bhaal Chandrama Sohat Neeke
    Kaanan Kundal Naagphani Ke

    Ang Gaur Shir Gang Bahaye
    Mundmaal Tan Kshaar Lagaye

    Vastra Khaal Baaghambar Sohe
    Chhavi Ko Dekhi Naag Man Mohe

    Maina Matu Ki Have Dulari
    Baam Ang Sohat Chhavi Nyaari

    Kar Trishool Sohat Chhavi Bhaari
    Karat Sada Shatrun Kshaykaari

    Nandi Ganesh Sohai Tahan Kaise
    Saagar Madhya Kamal Hain Jaise

    Kartik Shyam Aur Ganraau
    Ya Chhavi Ko Kahi Jaat Na Kaau

    Devan Jabahi Jaay Pukaara
    Tab Hi Dukh Prabhu Aap Nivaara

    Kiya Upadrav Taarak Bhaari
    Devan Sab Mili Tumahi Juhari

    Turat Shadanan Aap Pathaayu
    Lavanimesh Mah Maar Girayu

    Aap Jalandhar Asur Sanhaara
    Suyash Tumhaar Vidit Sansara

    Tripurasur San Yuddh Machayi
    Sabahi Kripa Kar Leen Bachaayi

    Kiya Tapahi Bhagirath Bhaari
    Purab Pratigya Taasu Puraari

    Daanin Mah Tum Sam Kou Naahi
    Sevak Stuti Karat Sadaahi

    Ved Naam Mahima Tav Gaayi
    Akath Anaadi Bhed Nahin Paayi

    Prakati Udadhi Manthan Mein Jwala
    Jarat Suraasur Bhaye Vihaala

    Keenhi Daya Tahan Kari Sahaayi
    Neelkanth Tab Naam Kahaayi

    Poojan Ramchandra Jab Keenha
    Jeet Ke Lank Vibhishan Deenha

    Sahas Kamal Mein Ho Rahe Dhaari
    Keenh Pareeksha Tabahin Puraari

    Ek Kamal Prabhu Raakheu Joi
    Kamal Nayan Poojan Chahan Soi

    Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar
    Bhaye Prasann Diye Ichhit Var

    Jai Jai Jai Anant Avinaashi
    Karat Kripa Sab Ke Ghatvaasi

    Dusht Sakal Nit Mohi Sataave
    Bhramat Rahoun Mohi Chain Na Aave

    Traahi Traahi Main Naath Pukaaro
    Yehi Avasar Mohi Aan Ubaaro

    Lai Trishool Shatrun Ko Maaro
    Sankat Se Mohi Aan Ubaaro

    Maat-Pita Bhrata Sab Hoi
    Sankat Mein Poochat Nahin Koi

    Swami Ek Hai Aas Tumhaari
    Aay Harahu Mam Sankat Bhaari

    Dhan Nirdhan Ko Det Sada Heen
    Jo Koi Jaanche So Phal Paahin

    Astuti Kehi Vidhi Karen Tumhaari
    Kshamahu Naath Ab Chook Hamaari

    Shankar Ho Sankat Ke Naashan
    Mangal Kaaran Vighn Vinaashan

    Yogi Yati Muni Dhyaan Lagaavein
    Sharad Narad Sheesh Navaavein

    Namo Namo Jai Namah Shivaay
    Sur Brahmadik Paar Na Paay

    Jo Yah Paath Kare Man Laayi
    Taa Par Hot Hai Shambhu Sahaayi

    Riniyaan Jo Koi Ho Adhikaari
    Paath Kare So Paavan Haari

    Putra Heen Kar Ichchha Joi
    Nishchay Shiv Prasaad Tehi Hoi

    Pandit Trayodashi Ko Laave
    Dhyaan Poorvak Hom Karaave

    Trayodashi Vrat Kare Hamesha
    Taake Tan Nahin Rahai Kalesha

    Dhoop Deep Naivedya Chadhaave
    Shankar Sammukh Paath Sunaave

    Janm Janm Ke Paap Nasaave
    Ant Dhaam Shivpur Mein Paave

    Kahain Ayodhyadas Aas Tumhaari
    Jaani Sakal Dukh Harahu Hamaari

    Doha

    Nit Nem Kar Praatah Hi, Paath Karau Chalisa
    Tum Meri Manokamna, Poorn Karo Jagdeesha

    Magsar Chhathi Hemant Ritu, Samvat Chausath Jaan
    Astuti Chalisa Shivahi, Poorn Keen Kalyaan