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10 दिनों की गणेश पूजा विधि: घर पर गणेश जी की स्थापना से विसर्जन तक पूरी जानकारी

    गणेश जी की पूजा में सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत ज्यादा दिखावा या ढेर सारी सामग्री की जरूरत नहीं होती। अगर मन में श्रद्धा है, पूजा की जगह साफ है और आप भगवान गणेश को प्रेम से याद कर रहे हैं, तो पूजा अपने आप सुंदर हो जाती है। गणेश उत्सव के समय बहुत से लोग घर में गणेश जी की स्थापना करते हैं और कुछ दिनों तक रोज सुबह-शाम पूजा और आरती करते हैं। किसी के घर में डेढ़ दिन के लिए गणेश जी आते हैं, तो कोई 3, 5, 7 या 10 दिनों तक उनकी पूजा करता है।

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    गणेश चतुर्थी 2026 से 10 दिवसीय गणेश उत्सव कब तक चलेगा?

    गणेश उत्सव 2026 की शुरुआत 14 सितंबर 2026, सोमवार को गणेश चतुर्थी से होगी। अगर आप घर पर 10 दिनों के लिए गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं, तो 14 सितंबर को स्थापना और पूजा से उत्सव की शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद अगले 10 दिनों तक श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा, आरती, मंत्र जाप और भोग अर्पित किया जा सकता है। 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ होगा। हालांकि, विसर्जन की परंपरा परिवार और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    अगर आपने इस बार 10 दिनों के लिए गणेश जी की स्थापना करने का फैसला किया है और सोच रहे हैं कि पूजा में क्या-क्या चाहिए और रोज पूजा कैसे करनी है, तो यह पूरी जानकारी आपके काम आएगी।

    इस लेख में हम शुरुआत से लेकर विसर्जन तक पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझेंगे।

    सबसे पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लें

    गणेश जी की स्थापना के दिन पूजा की सामग्री ढूंढने में भागदौड़ न करनी पड़े, इसलिए बेहतर है कि एक-दो दिन पहले ही सामान इकट्ठा कर लें।

    आपको सामान्य रूप से इन चीजों की जरूरत पड़ेगी:

    • गणेश जी की प्रतिमा
    • एक साफ चौकी
    • लाल या पीला कपड़ा
    • कलश
    • नारियल
    • आम के पत्ते
    • मौली या कलावा
    • रोली या कुमकुम
    • हल्दी
    • सिंदूर
    • चंदन
    • अक्षत यानी साबुत चावल
    • दूर्वा
    • ताजे फूल और माला
    • धूप और अगरबत्ती
    • कपूर
    • दीपक
    • घी या तेल
    • रूई की बत्ती
    • गंगाजल
    • सुपारी
    • पान के पत्ते
    • जनेऊ
    • फल
    • मोदक या लड्डू
    • पंचामृत की सामग्री
    • पूजा की थाली और छोटी कटोरियां

    इनमें से कुछ चीजें रोज इस्तेमाल होंगी और कुछ सिर्फ स्थापना के दिन काम आएंगी।

    दूर्वा और फूल रोज ताजे लेना बेहतर रहता है, इसलिए इन्हें 10 दिन का एक साथ खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है।

    गणेश जी की स्थापना से पहले क्या करें?

    सबसे पहले घर में उस जगह की अच्छी तरह सफाई कर लें जहां गणेश जी को स्थापित करना है।

    ऐसी जगह चुनें जहां परिवार के लोग आसानी से बैठकर पूजा कर सकें। बहुत ऊंची या ऐसी जगह जहां प्रतिमा को संभालना मुश्किल हो, वहां स्थापना करने से बचें।

    चौकी को साफ करके उसके ऊपर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा दें।

    अब गणेश जी की प्रतिमा को बहुत सावधानी से चौकी पर रखें।

    गणेश जी के सामने दीपक, धूप और पूजा की बाकी सामग्री रखें।

    अगर आप कलश भी स्थापित कर रहे हैं तो उसे गणेश जी के पास रखें। कलश में जल भरकर उसमें अक्षत और सुपारी रख सकते हैं। ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा भी कई घरों में है।

    यहां एक बात याद रखना जरूरी है—हर घर में पूजा की विधि बिल्कुल एक जैसी नहीं होती। इसलिए आपके परिवार में पहले से कोई विशेष परंपरा चली आ रही है तो उसे प्राथमिकता दें।

    गणेश जी की स्थापना कैसे करें?

    स्थापना के समय सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें।

    हाथ जोड़कर कुछ क्षण शांत बैठें और मन में भगवान गणेश को अपने घर आने के लिए आमंत्रित करें।

    इसके बाद यह सरल मंत्र बोल सकते हैं:

    ॐ गं गणपतये नमः।

    अब पूजा का संकल्प लें।

    इसके लिए कोई बहुत कठिन संस्कृत मंत्र याद होना जरूरी नहीं है। आप अपने शब्दों में भी कह सकते हैं:

    “हे गणपति महाराज, मैं श्रद्धा और भक्ति से आपकी पूजा कर रहा/रही हूं। हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें। घर में सुख, शांति और सद्बुद्धि बनी रहे और सभी के जीवन में मंगल हो।”

    इतना कहना भी पर्याप्त है।

    क्या गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए?

    स्थापना के समय कई लोग गणेश जी का पंचामृत से अभिषेक करते हैं।

    पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और मिश्री का इस्तेमाल किया जाता है।

    लेकिन यहां प्रतिमा की सामग्री का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

    अगर आपकी गणेश प्रतिमा ऐसी है जिस पर पानी डालना सुरक्षित है, तो जल या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। अगर प्रतिमा मिट्टी या किसी ऐसी सामग्री की है जिसे पानी से नुकसान हो सकता है, तो उस पर ज्यादा पानी डालने से बचें।

    ऐसी स्थिति में गंगाजल के कुछ छींटे देकर प्रतीकात्मक रूप से स्नान कराया जा सकता है।

    इसके बाद गणेश जी को वस्त्र अर्पित करें।

    Ganesh Poojan Vidhi Vatsa Bhakti
    Ganesh Poojan Vidhi Vatsa Bhakti

    गणेश जी को चंदन, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं

    अब गणेश जी को चंदन लगाएं।

    इसके बाद सिंदूर अर्पित करें और अक्षत चढ़ाएं।

    फिर भगवान गणेश को फूल और दूर्वा अर्पित करें।

    हर चीज चढ़ाते समय आप सरलता से:

    ॐ गं गणपतये नमः

    का जाप कर सकते हैं।

    पूजा में मंत्रों की संख्या से ज्यादा जरूरी यह है कि आपका मन पूजा में लगा हो।

    गणेश जी को दूर्वा कैसे चढ़ाएं?

    गणेश जी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है।

    दूर्वा चढ़ाने से पहले उसे साफ कर लें। कोशिश करें कि पूजा में ताजी और साफ दूर्वा ही इस्तेमाल हो।

    दूर्वा हाथ में लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें और मंत्र बोलते हुए उन्हें अर्पित करें:

    ॐ गं गणपतये नमः।

    दूर्वा कितनी चढ़ानी चाहिए, इसे लेकर अलग-अलग परिवारों और पूजा-पद्धतियों में अलग परंपराएं मिलती हैं। इसलिए संख्या को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

    अगर आपके परिवार में कोई निश्चित नियम है तो उसी का पालन करें।

    गणेश जी को कौन से फूल चढ़ाएं?

    गणेश जी को ताजे और साफ फूल चढ़ाएं।

    लाल फूल पूजा में आम तौर पर पसंद किए जाते हैं, लेकिन आपके पास जो ताजे फूल उपलब्ध हों, उन्हें भी श्रद्धा से अर्पित किया जा सकता है।

    फूल चढ़ाते समय मन में अपने परिवार के लिए सुख, स्वास्थ्य, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

    दीपक और धूप जलाएं

    अब गणेश जी के सामने दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती करें।

    दीपक को ऐसी जगह रखें जहां उसके गिरने की संभावना न हो। अगर घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं तो कपूर और दीपक को उनकी पहुंच से दूर रखना बेहतर है।

    पूजा के दौरान कुछ देर भगवान गणेश के सामने शांत बैठना भी अच्छा लगता है। हर समय कुछ बोलते रहना जरूरी नहीं है।

    गणेश जी को भोग कैसे लगाएं?

    अब भगवान गणेश को भोग लगाएं।

    गणेश पूजा में मोदक और लड्डू का भोग विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसके अलावा केला, सेब, नारियल, गुड़ और अन्य फल भी रख सकते हैं।

    अगर घर में प्रसाद बनाया गया है तो वही भगवान को अर्पित करें।

    भोग लगाने के बाद कुछ देर भगवान गणेश का ध्यान करें। फिर प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांट दें।

    10 दिनों के लिए भोग का आसान तरीका

    अगर आप हर दिन कुछ अलग रखना चाहते हैं तो यह एक सरल योजना हो सकती है:

    पहला दिन: मोदक और केला
    दूसरा दिन: लड्डू और सेब
    तीसरा दिन: मोदक और नारियल
    चौथा दिन: गुड़ और केला
    पांचवां दिन: मोदक और अन्य फल
    छठा दिन: लड्डू और केला
    सातवां दिन: गुड़-नारियल और फल
    आठवां दिन: मोदक और लड्डू
    नौवां दिन: मोदक और फल
    दसवां दिन: मोदक, लड्डू और फल

    यह कोई अनिवार्य नियम नहीं है। घर में जो सात्त्विक भोजन उपलब्ध हो, उसे भी भोग में रखा जा सकता है।

    रोज गणेश जी की पूजा कैसे करें?

    स्थापना के बाद रोज बहुत लंबी पूजा करना जरूरी नहीं है।

    अगर सुबह समय मिल जाए तो कुछ मिनट भगवान गणेश के सामने बैठें।

    पूजा का सरल क्रम इस तरह रख सकते हैं:

    दीपक → धूप → चंदन → सिंदूर → अक्षत → दूर्वा → फूल → भोग → मंत्र → आरती

    बस इतना करने से भी आपकी रोज की पूजा व्यवस्थित तरीके से हो जाएगी।

    अगर शाम को समय मिलता है तो शाम को भी आरती कर सकते हैं।

    परिवार के सभी लोग साथ में आरती करें तो पूजा का वातावरण और भी अच्छा बन जाता है।

    गणेश जी का कौन सा मंत्र बोलें?

    अगर आप सिर्फ एक मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो:

    ॐ गं गणपतये नमः।

    यह सरल मंत्र है और पूजा के दौरान आसानी से बोला जा सकता है।

    आप इसे 11, 21 या अपनी सुविधा के अनुसार अधिक बार बोल सकते हैं।

    इसके अलावा गणेश जी की स्तुति या गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ भी अपनी परंपरा और समय के अनुसार किया जा सकता है।

    10 दिनों की पूजा का आसान कार्यक्रम

    पूरे 10 दिनों को लेकर अगर आप थोड़ा व्यवस्थित रहना चाहते हैं तो यह तरीका अपना सकते हैं।

    दिन 1 — स्थापना

    इस दिन पूजा थोड़ी विस्तार से करें।

    गणेश जी की स्थापना, कलश पूजन, अभिषेक या प्रतीकात्मक स्नान, चंदन, सिंदूर, दूर्वा, फूल, भोग, मंत्र और आरती करें।

    पहले दिन मोदक का भोग रखना अच्छा विकल्प है।

    दिन 2 से दिन 4

    इन दिनों रोज की सरल पूजा करें।

    दूर्वा, फूल, सिंदूर, चंदन, धूप, दीप और भोग अर्पित करें।

    समय मिले तो मंत्र जाप और आरती करें।

    दिन 5 से दिन 7

    इसी तरह नियमित पूजा जारी रखें।

    इन दिनों परिवार के लोग मिलकर शाम की आरती कर सकते हैं।

    दिन 8 और 9

    पूजा के साथ भगवान गणेश के सामने कुछ समय बैठें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

    नौवें दिन अगले दिन होने वाले विसर्जन की तैयारी भी कर लें।

    दिन 10 — विसर्जन

    विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा करें।

    फूल, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत और भोग अर्पित करें।

    फिर आरती करें और भगवान गणेश से पूरे उत्सव के दौरान हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।

    गणेश विसर्जन कैसे करें?

    विसर्जन से पहले गणेश जी के सामने बैठकर मन से धन्यवाद करें।

    आप इस तरह प्रार्थना कर सकते हैं:

    “हे गणपति महाराज, आपने हमारे घर आकर हमें अपना आशीर्वाद दिया। पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल के लिए हमें क्षमा करें। हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें और घर में सुख, शांति और सद्बुद्धि बनाए रखें। अगले वर्ष फिर हमारे घर पधारें।”

    इसके बाद गणेश जी की आरती करें।

    फिर प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन के लिए ले जाएं।

    विसर्जन के समय लोग श्रद्धा से कहते हैं:

    गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

    गणेश विसर्जन में पर्यावरण का ध्यान रखें

    गणेश उत्सव खुशी और भक्ति का पर्व है, इसलिए उत्सव के साथ पर्यावरण का ध्यान रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

    संभव हो तो मिट्टी या पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा चुनें।

    विसर्जन स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर ही करें। फूल-माला, प्लास्टिक और पूजा की दूसरी सामग्री को पानी में डालने के बजाय अलग से एकत्र करके उचित तरीके से निपटाएं।

    अगर आपके क्षेत्र में घर पर विसर्जन की व्यवस्था की जाती है तो स्थानीय नियमों के अनुसार ही करें।

    अगर किसी दिन पूजा ठीक से न हो पाए तो?

    यह सवाल बहुत से लोगों के मन में रहता है।

    कभी ऑफिस का काम बढ़ जाता है, कभी घर में कोई जरूरी काम आ जाता है और कभी समय ही नहीं मिल पाता।

    ऐसे में पूजा को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

    समय कम हो तो भगवान गणेश के सामने दीपक जलाकर, दूर्वा और फूल अर्पित करके कुछ मिनट मंत्र जाप और आरती कर लें।

    पूजा को तनाव का कारण बनाने के बजाय इसे मन को शांत करने और भगवान को याद करने का अवसर बनाएं।

    गणेश पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?

    पूजा करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना अच्छा रहता है।

    • पूजा की जगह साफ रखें।
    • फूल और दूर्वा साफ एवं ताजे रखें।
    • भोग सात्त्विक रखें।
    • दीपक और कपूर को सुरक्षित जगह पर रखें।
    • प्रतिमा की सामग्री देखकर ही अभिषेक करें।
    • पूजा में परिवार की परंपरा का सम्मान करें।
    • सामग्री कम पड़ जाए तो परेशान न हों।
    • विसर्जन स्थानीय नियमों के अनुसार करें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा के लिए की जाए।

    गणेश पूजा की पूरी Checklist

    अगर आपको रोज की पूजा के समय कुछ भूलने का डर रहता है तो यह छोटी सी checklist अपने पास रख सकते हैं:

    ☐ पूजा स्थान साफ किया
    ☐ दीपक जलाया
    ☐ धूप/अगरबत्ती की
    ☐ चंदन लगाया
    ☐ सिंदूर चढ़ाया
    ☐ अक्षत चढ़ाया
    ☐ दूर्वा चढ़ाई
    ☐ फूल चढ़ाए
    ☐ भोग लगाया
    ☐ गणेश मंत्र का जाप किया
    ☐ आरती की
    ☐ परिवार के लिए प्रार्थना की

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    गणेश जी की पूजा में सबसे जरूरी सामग्री कौन सी है?

    दूर्वा, फूल, सिंदूर, चंदन, अक्षत, दीपक, धूप और भोग पूजा की प्रमुख सामग्री हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों में सामग्री और विधि अलग हो सकती है।

    क्या गणेश जी को रोज दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

    गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। अगर संभव हो तो रोज साफ और ताजी दूर्वा चढ़ा सकते हैं।

    गणेश जी को कौन सा भोग लगाना चाहिए?

    मोदक और लड्डू सबसे लोकप्रिय भोगों में हैं। इसके अलावा फल, गुड़ और नारियल भी अर्पित किए जा सकते हैं।

    क्या रोज पंचामृत से अभिषेक करना जरूरी है?

    नहीं। रोज अभिषेक करना आवश्यक नहीं है। खासकर ऐसी प्रतिमा पर पानी या पंचामृत न डालें जिसे इससे नुकसान हो सकता है।

    क्या 10 दिनों तक रोज पूरी पूजा करनी जरूरी है?

    नहीं। समय के अनुसार पूजा को सरल रखा जा सकता है। दीपक, धूप, दूर्वा, फूल, भोग, मंत्र और आरती के साथ छोटी पूजा भी की जा सकती है।

    क्या गणेश जी की पूजा में परिवार के सभी सदस्य शामिल हो सकते हैं?

    बिल्कुल। परिवार के सदस्य अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार पूजा, मंत्र जाप और आरती में शामिल हो सकते हैं।

    गणेश विसर्जन के समय क्या कहना चाहिए?

    विसर्जन के समय श्रद्धा से “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” कहा जाता है।

    अंत में

    गणेश उत्सव की खूबसूरती सिर्फ पूजा की लंबी विधि में नहीं है। असली खुशी उस समय मिलती है जब पूरा परिवार साथ बैठता है, आरती करता है और कुछ समय के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर भगवान गणेश को याद करता है।

    इसलिए अगर आपके पास पूजा की हर सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो इसे लेकर परेशान न हों। जो उपलब्ध है, उसी से श्रद्धा के साथ पूजा करें।

    गणपति जी से अपने और अपने परिवार के लिए सुख, शांति, सद्बुद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।

    गणपति बप्पा मोरया!
    अगले बरस तू जल्दी आ

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