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श्री रामाष्टकम् – Ramashtakam meaning in Hindi – Download PDF

    श्री रामाष्टकम् एक अत्यंत सुंदर और भक्तिभाव से भरपूर स्तुति है, जिसे महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचा गया माना जाता है। इसमें भगवान श्रीराम के दिव्य गुणों (Shri Ram Stuti), उनके चरित्र, मर्यादा और करुणा का वर्णन(Shri Ram Ashtakam explanation) किया गया है। यह स्तोत्र केवलआठ श्लोकों (अष्टकम्) में श्रीराम की महिमा को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। भगवान श्रीराम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है, यानी वह पुरुष जो आदर्श जीवन जीने की सर्वोच्च मर्यादा स्थापित करता है। श्री रामाष्टकम् (Shri ram stuti lyrics ) – Ramashtakam meaning in Hindi में उनके इसी आदर्श रूप का वर्णन मिलता है। वे एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा थे। उन्होंने अपने जीवन में हर परिस्थिति में धर्म का पालन किया।

    यह श्रीरामाष्टकम् भगवान राम की स्तुति में रचा गया एक सुंदर स्तोत्र है
    यह श्रीरामाष्टकम् भगवान राम की स्तुति में रचा गया एक सुंदर स्तोत्र है

    ॥ श्रीरामाष्टकम् ॥ महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचा गया – Shri Ram Stuti Lyrics


    भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।
    स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम् ॥ १॥

    Ramashtakam meaning in Hindi : मैं उस श्रीराम का भजन करता हूँ जो अत्यंत सुंदर हैं, सभी पापों का नाश करने वाले हैं और अपने भक्तों के मन को आनंदित करते हैं। वे सदा एकरस (अद्वैत) स्वरूप में स्थित हैं।

    जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकम् ।
    स्वभक्तभीतिभङ्जनं भजेह राममद्वयम् ॥ २॥

    Shri Ram Ashtakam explanation : मैं उन श्रीराम की पूजा करता हूँ जिनकी जटाएँ अत्यंत शोभायमान हैं, जो सभी पापों को नष्ट करते हैं और अपने भक्तों के भय को दूर कर देते हैं।

    निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवापहम् ।
    समं शिवं निरञ्जनं भजेह राममद्वयम् ॥ ३॥

    Shri Ram Ashtakam explanation :वे भगवान अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान देने वाले हैं, अत्यंत कृपालु हैं और संसार के दुखों को दूर करने वाले हैं। वे समान भाव वाले, कल्याणकारी और निष्कलंक हैं।

    सहप्रपञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम् ।
    निराकृतिं निरामयं भजेह राममद्वयम् ॥ ४॥

    यह संसार भगवान की माया से बना हुआ है, लेकिन वास्तव में वे नाम और रूप से परे हैं। वे निराकार और सभी रोग-दोषों से मुक्त हैं—मैं ऐसे श्रीराम का भजन करता हूँ।

    निष्प्रपञ्चनिर्विकल्पनिर्मलं निरामयम्।
    चिदेकरूपसन्ततं भजेह राममद्वयम् ॥ ५॥

    भगवान श्रीराम इस संसार से परे हैं, किसी भी विकल्प या भेदभाव से रहित हैं, शुद्ध और निरोग हैं। वे चैतन्य (चेतना) के एकमात्र रूप में निरंतर स्थित हैं।

    भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम् ।
    गुणाकरं कृपाकरं भजेह राममद्वयम् ॥ ६॥

    वे भगवान इस संसार रूपी समुद्र से पार कराने वाली नाव के समान हैं। वे सभी शरीरों में व्याप्त हैं, गुणों के भंडार और अत्यंत कृपालु हैं।

    महावाक्यबोधकैर्विराजमनवाक्पदैः ।
    परब्रह्म व्यापकं भजेह राममद्वयम् ॥ ७॥

    महावाक्यों (वेदों के गूढ़ ज्ञान) से जिनका बोध होता है, जो शब्दों से परे हैं, ऐसे सर्वव्यापक परब्रह्म श्रीराम का मैं भजन करता हूँ।

    शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम् ।
    विराजमानदैशिकं भजेह राममद्वयम् ॥ ८॥

    वे भगवान कल्याण देने वाले, सुख देने वाले, जन्म-मरण के दुख को समाप्त करने वाले और भ्रम (मोह) को दूर करने वाले हैं। वे गुरु के रूप में प्रकाशित होते हैं।

    रामाष्टकं पठति यः सुकरं सुपुण्यं
    व्यासेन भाषितमिदं श‍ृणुते मनुष्यः ।
    विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं
    सम्प्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम् ॥ ९॥

    जो मनुष्य इस रामाष्टक का पाठ करता है या सुनता है, वह विद्या, धन, अपार सुख और अनंत यश प्राप्त करता है। अंत में शरीर त्यागने पर उसे मोक्ष (मुक्ति) मिलती है।

    ॥ इति श्रीव्यासविरचितं रामाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

    भक्ति और श्रद्धा का महत्व

    इस स्तोत्र में भक्त अपने हृदय की गहराइयों से श्रीराम का स्मरण करता है और उनसे कृपा की याचना करता है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि मन की सच्चाई और समर्पण से होती है। जब हम श्रीराम का नाम लेते हैं, तो हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है।

    सरल भाषा में भाव

    श्री रामाष्टकम् का मूल संस्कृत में है, जो हर किसी के लिए समझना थोड़ा कठिन हो सकता है। लेकिन जब इसे सरल (मानव) भाषा में समझा जाता है, तो इसका अर्थ बहुत सहज और हृदयस्पर्शी बन जाता है। इसमें कहा गया है कि श्रीराम ही हमारे जीवन के मार्गदर्शक हैं, वे हमारे दुखों को दूर करने वाले हैं और हमें सही रास्ता दिखाते हैं।

    जीवन में श्रीराम के आदर्श

    यह स्तोत्र केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला भी सिखाता है। श्रीराम के गुणों को अपनाकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। जैसे—सत्य बोलना, बड़ों का सम्मान करना, कर्तव्य निभाना और दूसरों के प्रति दया रखना।

    श्री रामाष्टकम् एक छोटी लेकिन अत्यंत प्रभावशाली रचना है, जो हमें भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम और श्रद्धा बढ़ाने के साथ-साथ एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती है। यदि हम इसके भाव को समझकर अपने जीवन में उतारें, तो निश्चित ही हमारा जीवन सुख, शांति और सफलता से भर सकता है।

    “श्रीराम का नाम ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है।”

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