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अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे Lyrics (हिंदी और Roman English) |

    कभी-कभी कुछ भजन ऐसे होते हैं जिन्हें सुनते ही मन शांत हो जाता है। ऐसा लगता है मानो भक्त अपने हृदय की सारी पीड़ा भगवान के चरणों में रख रहा हो। “अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे” ऐसा ही एक भावपूर्ण भजन है।

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    इस भजन में न कोई दिखावा है और न ही कोई बड़ी-बड़ी बातें। इसमें केवल एक भक्त की सच्ची प्रार्थना है। वह भगवान से कहता है कि यदि आप मेरे दोषों को ही देखते रहेंगे, तो मेरा उद्धार कैसे होगा? आपकी कृपा ही मुझे इस संसार रूपी भवसागर से पार लगा सकती है।

    यही कारण है कि यह भजन वर्षों से मंदिरों, सत्संगों, कथा आयोजनों और भजन संध्याओं में बड़ी श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे Lyrics in Hindi

    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
    तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे॥

    हमारे लिए क्यों देर किए हो,
    हमारे लिए क्यों देर किए हो।
    गणिका अजामिल को पल में उबारे,
    गणिका अजामिल को पल में उबारे।
    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
    तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे॥

    पतितों को पावन करते कृपानिधि,
    पतितों को पावन करते कृपानिधि।
    किए पाप हैं इस सुयश के सहारे,
    किए पाप हैं इस सुयश के सहारे।
    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
    तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे॥

    माना अधम हैं, अपावन, कुटिल हैं,
    माना अधम हैं, अपावन, कुटिल हैं।
    सब कुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे,
    सब कुछ है लेकिन प्रभु हम तुम्हारे।
    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
    तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे॥

    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे,
    तो हम कैसे भव से लगेंगे किनारे॥

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    Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare Lyrics in Roman English

    Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare,
    To Hum Kaise Bhav Se Lagenge Kinare.

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    Hamare Liye Kyon Der Kiye Ho.
    Ganika Ajamil Ko Pal Mein Ubare,
    Ganika Ajamil Ko Pal Mein Ubare.
    Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare,
    To Hum Kaise Bhav Se Lagenge Kinare.

    Patiton Ko Pavan Karte Kripanidhi,
    Patiton Ko Pavan Karte Kripanidhi.
    Kiye Paap Hain Is Suyash Ke Sahare,
    Kiye Paap Hain Is Suyash Ke Sahare.
    Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare,
    To Hum Kaise Bhav Se Lagenge Kinare.

    Mana Adham Hain, Apavan, Kutil Hain,
    Mana Adham Hain, Apavan, Kutil Hain.
    Sab Kuchh Hai Lekin Prabhu Hum Tumhare,
    Sab Kuchh Hai Lekin Prabhu Hum Tumhare.
    Agar Nath Dekhoge Avgun Hamare,
    To Hum Kaise Bhav Se Lagenge Kinare.

    इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता

    इस भजन की सबसे सुंदर बात यह है कि इसमें भक्त भगवान के सामने अपनी अच्छाइयों का बखान नहीं करता। वह अपनी कमियों को स्वीकार करता है। आज की दुनिया में हर व्यक्ति अपनी उपलब्धियों की बात करता है, लेकिन सच्ची भक्ति वहीं से शुरू होती है जहाँ इंसान अपने दोषों को पहचान लेता है। यही भाव इस भजन को इतना लोकप्रिय बनाता है। जब कोई श्रद्धालु इस भजन को गाता है तो उसके शब्द केवल होंठों से नहीं निकलते, बल्कि सीधे हृदय से निकलते हैं।

    “अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे” का सरल अर्थ

    इस भजन का सीधा सा अर्थ है— “हे प्रभु! मैं जानता हूँ कि मुझमें अनेक दोष हैं। मुझसे जीवन में बहुत गलतियाँ हुई हैं। लेकिन यदि आप केवल मेरी कमियों को ही देखते रहेंगे, तो मेरा उद्धार कैसे होगा? आपकी दया और कृपा ही मेरी सबसे बड़ी आशा है।”

    यही समर्पण इस भजन को साधारण भजन से कहीं अधिक बना देता है।

    गणिका और अजामिल का उल्लेख क्यों किया गया है?

    जब भक्त कहता है—

    “गणिका अजामिल को पल में उबारे”

    तो वह भगवान को उनकी करुणा की याद दिलाता है।

    धार्मिक कथाओं में गणिका और अजामिल दोनों ऐसे पात्र माने जाते हैं जिन्होंने जीवन में अनेक गलतियाँ कीं। लेकिन अंत में भगवान के नाम और उनकी कृपा ने उनका उद्धार कर दिया।

    भक्त का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—

    “जब आपने उन लोगों को अपना लिया, तो मुझ पर भी कृपा कीजिए।”

    यही विनम्रता इस भजन की आत्मा है।

    “पतितों को पावन करते कृपानिधि” का भाव

    इस पंक्ति में भगवान को “कृपानिधि” कहा गया है, अर्थात कृपा का अथाह सागर। भक्त कहता है कि आपकी पहचान ही यही है कि आप गिरे हुए लोगों को भी अपना लेते हैं। यदि आप केवल योग्य लोगों पर ही कृपा करेंगे, तो फिर आपकी करुणा का महत्व कैसे दिखाई देगा? यह भाव भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संवाद जैसा महसूस होता है।

    इस भजन से हमें क्या सीख मिलती है?

    यह भजन केवल गाने के लिए नहीं है, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देता है। सबसे पहली सीख है कि कभी भी अपने अहंकार को बड़ा मत बनने दीजिए। दूसरी सीख यह है कि भगवान के सामने हमेशा सच्चे मन से जाएँ। उन्हें शब्दों से नहीं, भाव से प्रसन्न किया जा सकता है। तीसरी सीख यह है कि जीवन में चाहे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, यदि पश्चाताप सच्चा है तो भगवान की कृपा का द्वार कभी बंद नहीं होता।

    यह भजन इतना लोकप्रिय क्यों है?

    भारत के लगभग हर राज्य में यह भजन किसी न किसी स्वर में गाया जाता है। सत्संग हो, भागवत कथा हो, राम कथा हो या फिर किसी मंदिर की संध्या आरती—यह भजन वातावरण को भक्ति से भर देता है। कई प्रसिद्ध भजन गायक भी इसे अपनी मधुर आवाज़ में गा चुके हैं, जिसके कारण नई पीढ़ी भी इस भजन से जुड़ रही है।

    कब गाया जाता है?

    इस भजन का कोई निश्चित समय नहीं है। सुबह की पूजा में भी इसे गाया जाता है। शाम की आरती में भी। भजन संध्या, कथा, कीर्तन, एकादशी, पूर्णिमा और व्यक्तिगत साधना के समय भी श्रद्धालु इसे पूरे भाव से गाते हैं।

    नियमित रूप से यह भजन सुनने के लाभ

    धार्मिक मान्यता है कि जब मन अशांत हो, आत्मविश्वास कम होने लगे या जीवन में निराशा महसूस हो, तब ऐसे करुणा-रस से भरे भजन मन को नई ऊर्जा देते हैं। इस भजन को सुनने या गाने से मन शांत होता है। ईश्वर के प्रति विश्वास मजबूत होता है। अहंकार कम होता है। समर्पण की भावना बढ़ती है। मानसिक तनाव कम महसूस होता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

    आज के समय में इस भजन का महत्व

    आज इंसान के पास सुविधाएँ तो बहुत हैं, लेकिन मन की शांति कम होती जा रही है।

    हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव या असफलता से जूझ रहा है।

    ऐसे समय में “अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे” केवल एक भजन नहीं, बल्कि आत्मा को सुकून देने वाली प्रार्थना बन जाता है।

    यह हमें याद दिलाता है कि भगवान के दरबार में देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं।

    यदि मन सच्चा हो, तो प्रभु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे Lyrics केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक भक्त की आत्मा की पुकार है। इसमें विनम्रता है, पश्चाताप है, विश्वास है और सबसे बढ़कर भगवान की असीम कृपा पर अटूट भरोसा है।

    यदि आपने अभी तक इस भजन को केवल सुना है, तो एक बार इसके शब्दों को ध्यान से पढ़िए। हर पंक्ति आपको ईश्वर के और अधिक निकट ले जाने का प्रयास करती है। शायद यही कारण है कि यह भजन पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के हृदय में अपनी विशेष जगह बनाए हुए है।

    Frequently Asked Questions

    अगर नाथ देखोगे अवगुण हमारे भजन किस भगवान को समर्पित है?

    यह भजन भगवान की करुणा और कृपा का गुणगान करता है। इसे सामान्य रूप से श्रीहरि, श्रीराम या भगवान के सार्वभौमिक स्वरूप की प्रार्थना के रूप में गाया जाता है।

    क्या इस भजन का रोज़ पाठ किया जा सकता है?

    हाँ। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका दैनिक पाठ या श्रवण किया जा सकता है।

    इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

    यह भजन सिखाता है कि भगवान अपने भक्त के दोष नहीं, बल्कि उसके सच्चे समर्पण और पश्चाताप को देखते हैं।

    क्या इस लेख में हिंदी और Roman English दोनों Lyrics दिए गए हैं?

    हाँ, ऊपर दोनों स्वरूपों में संपूर्ण Lyrics दिए गए हैं ताकि हर श्रद्धालु आसानी से पढ़ सके और गा सके।

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